सैफपुर प्राथमिक विद्यालय पर बुधवार को मिड डे मील का खीर खाने के बाद 39 बच्चों को उल्टी दस्त होने लगी।
बच्चों
को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यहां इलाज के बाद शाम को बच्चों
को छुट्टी दे दी गई। सूचना पर अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
सैफपुर
प्राथमिक विद्यालय में 89 बच्चे पढ़ते हैं। बुधवार को मीनू के हिसाब से दूध
और कोफ्ता, चावल का वितरण होना था, लेकिन इसकी जगह खीर बनी। सुबह दस बजे
बच्चों को खीर दी गई। इसे खाने के बाद 39 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। इसके
बाद अफरातफरी मच गई।
ग्रामीणों ने सौ नंबर पर सूचना दी। एंबुलेंस के लिए
108 नंबर डायल किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों ने निजी साधनों से
बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
यहां उनका उपचार हुआ। देर
शाम बच्चों की स्थिति में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दी गई। सूचना पाकर
उपजिलाधिकारी सकलडीहा जवाहर लाल श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डा. एनके प्रसाद,
डा. एसके मिश्रा व बेसिक शिक्षा अधिकारी फूलचंद्र यादव, बीडीओ बृजेश सिंह
आदि पहुंचे। डिप्टी सीएमओ ने बताया कि यह फूड प्वाइजनिंग नहीं, बल्कि
सेंटोसाइटिस (भोजन खराब होने की शुरुआत) है।
समय से बच्चों का इलाज नहीं
होता तो फू्ड प्वाइजनिंग हो सकती थी। कहा कि खीर की जांच की जाएगी।
उपजिलाधिकारी जवाहर लाल श्रीवास्तव ने बताया कि जांच के बाद कार्रवाई की
जाएगी। बीएसए फूलचंद यादव ने बताया कि मिड डे मील के राशन की पूरी
जिम्मेदारी प्रधान की होती है।
मीनू अनुसार खाना बनवाना प्रधानाध्यापक की
जिम्मेदारी है। भोजन को प्रधानाध्यापक ने क्यों नहीं चखा, इसकी जांच की
जाएगी। प्रधानाध्यापक का कहना है कि विद्यालय को ग्राम प्रधान राशन देते
हैं। बुधवार को चावल व दूध मिला। उसी से खीर बनवाई गई। रसोइये ने इसे चखा
भी था।
ग्राम प्रधान प्रियंका सिंह के पति हृदय नारायण सिंह ने बताया कि
उन्होंने दूध और चावल भेजवाया था। उसमें कोई गड़बड़ी नहीं थी।
कोट...
खीर को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच के बाद ही सच्चाई का पता चल सकेगा। इसी के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होगी।
- सुरेंद्र विक्रम, डीएम, चंदौली।
इनसेट
ये बच्चे हुए बीमार
गायत्री
(10), नंदिनी (9), आकांक्षा (8), गोल्डी (7), रोशन (7), कमलेश (10), सतीश
(9), छोटू (9), निशा (10), सोनी (10), अरेभ्या (6), शुभम (10), नेहा (6),
रामचंद्रन (6), गायत्री (10), आंसू (10), सूरज (7), अंशू (7), लक्ष्मी (7),
रघु (9), चहका (6), रवि (9), विपिन (6), अंजली (10), रचित (7) , रामचंद्र
(8), सपना (08) , शाहिद (6), पूजा (8), रेनू (10), प्रिया (10), आंचल (6),
शीतल(8) , रागिनी(9), अंकिता(9), रोली(9), खुशी (8), लक्ष्मी (10), श्वेता
(6) का उपचार करने के बाद छुट्टी दे दी गई।
इनसेट
परोसने से पहले नहीं चखी गई थी खीर
मुगलसराय।
वर्ष 2012 में स्कूलों के संचालन के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का गठन
किया गया है। कमेटी का काम स्कूल का सही ढंग से संचालन और कमियां देखना ही
है।
इसके अध्यक्ष का चयन चुनाव से होता है जबकि सचिव प्रधानाध्यापक होते
हैं। इसके अलावा समिति में पंद्रह सदस्य होते हैं, जो बच्चों के अभिभावक
होते हैं।
कमेटी का काम एमडीएम वितरित करने से पहले चख लेना है। यहां
दूध-कोफ्ता की जगह खीर बनाई गई। अभिभावकाें का कहना है कि अगर खीर चख ली
गई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।