महिलाएं किसी से कम नहीं है। पुरुषों के एकाधिकार वाले क्षेत्र में भी महिलाएं अपनी भागीदारी निभा रहीं हैं। स्थानीय रेलवे मंडल में पहली बार यात्री ट्रेनों के बाद मालगाड़ी की गार्ड बनकर चार महिलाओं ने अपनी काबिलियत से साबित किया है कि वे पुरुषों से कम नहीं हैं। मंडल में प्रशिक्षु गार्ड के रूप में तैनात सुधा रानी, पायल, ज्योतिका और रितु रेखा शाह पहली बार गया रेलवे स्टेशन से मालगाड़ी लेकर पीडीडीयू जंक्शन पहुंची। यहां स्टेशन निदेशक सहित अन्य ने महिला गार्ड को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया ।
प्लेटफार्म संख्या आठ पर दोपहर में तीन बजे मालगाड़ी लेकर पहुंची प्रशिक्षु गार्ड रितु रेखा शाह और ज्योति कुमारी के चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक दिख रही थी। गुड्स ट्रेन के पहुंचने के पहले ही महिला गार्डों के स्वागत के लिए अधिकारी पहुंच गए थे। मालगाड़ी के रुकते ही स्टेशन निदेशक हिमांशु शुक्ला, सीएसजी अशोक अनिल सहित अन्य ने पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। दोनों गार्डों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि चुनौती पूर्ण कार्य को करने में डर तो लगा लेकिन बाद में विश्वास बढ़ गया। मंडल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पृथ्वी राज ने बताया कि रेलवे महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार काम रही हैं। इसके मद्देनजर पहली बार महिला गार्ड को ट्रेनों के परिचालन की जिम्मेदारी दी गई। गया से पीडीडीयू जंक्शन तक के लिए दो मालगाड़ी लेकर पूर्व मध्य रेलवे की पहली महिला गार्ड सुधा कुमारी, प्रशिक्षु पायल रानी तथा ज्योतिका कुमारी व प्रशिक्षु रीतु रेखा शाह पहुंची हैं। पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में महिलाओं ने अत्यंत साहस का परिचय देते हुए कुशलता पूर्वक ट्रेनों का परिचालन किया है। वह अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। बताया कि डीआरएम पंकज सक्सेना ने महिलाओं को दिन में ड्यूटी देने का निर्देश दिया है।
पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्र में कदम रखने वाली महिला गार्डों ने लंबा संघर्ष किया है। परिवार, समाज से संघर्ष करते हुए चुनौती पूूर्ण क्षेत्र को चुना है। बिहार पीसीएस की तैयारी कर रही ज्योतिका पांडेय और रितु रेखा सहाय का चयन रेलवे में हो गया। पहली बार मालगाड़ी का गार्ड बनने की सूचना मिली तो एक झटके में परिवार वालों ने मना कर दिया लेकिन मनाने पर वे मान गए और उन दोनों ने भी चुनौती के रूप इस जाब को स्वीकार किया। बताया कि वे अभी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी है।
प्रशिक्षु गार्ड ज्योतिका पांडेय अपने किसान पिता रमेश पांडेय की बड़ी बेटी है। पटना जिले के विक्रम पाली में रहते हुए उसने रेलवे गार्ड का फार्म भरा और नौ अप्रैल को उसका सेलेक्शन हो गया। प्रशिक्षण के बाद 17 जून को पहली बार उसने दुर्गावती से मुगलसराय तक मालगाड़ी लाई थी लेकिन बुधवार को पहली बार पूरी जिम्मेदारी के साथ गया से पीडीडीयूनगर ट्रेन लेकर पहुंची। इसी तरह की कहानी रितु रेखा शाह की भी है। बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी रितू के पिता रामनरायन शाह ज्वेलरी शाप चलाते हैं। रेखा के बाद छोटी बहन और एक भाई है। तैयारी के दौरान रेखा ने रेलवे का फार्म भरा और गार्ड के रूप में सेलेक्शन हो गया। पहली बार मालगाडी लेकर चलने की बात आई तो मां रेेेखा ने मना कर दिया लेकिन पिता ने समझाया और हौसला बढ़ाया तो वह मालगाड़ी लेकर आई है।
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पहली बार माल गाड़ी लेकर पहुंची महिला गार्ड
अधिकारियों ने पुष्प गुच्छ देकर किया स्वागत
अमर उजाला ब्यूरो
सचित्र-
पीडीडीयू नगर। महिलाएं किसी से कम नहीं है। पुरुषों के एकाधिकार वाले क्षेत्र में भी महिलाएं अपनी भागीदारी निभा रहीं हैं। स्थानीय रेलवे मंडल में पहली बार यात्री ट्रेनों के बाद मालगाड़ी की गार्ड बनकर चार महिलाओं ने अपनी काबिलियत से साबित किया है कि वे पुरुषों से कम नहीं हैं। मंडल में प्रशिक्षु गार्ड के रूप में तैनात सुधा रानी, पायल, ज्योतिका और रितु रेखा शाह पहली बार गया रेलवे स्टेशन से मालगाड़ी लेकर पीडीडीयू जंक्शन पहुंची। यहां स्टेशन निदेशक सहित अन्य ने महिला गार्ड को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया ।
प्लेटफार्म संख्या आठ पर दोपहर में तीन बजे मालगाड़ी लेकर पहुंची प्रशिक्षु गार्ड रितु रेखा शाह और ज्योति कुमारी के चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक दिख रही थी। गुड्स ट्रेन के पहुंचने के पहले ही महिला गार्डों के स्वागत के लिए अधिकारी पहुंच गए थे। मालगाड़ी के रुकते ही स्टेशन निदेशक हिमांशु शुक्ला, सीएसजी अशोक अनिल सहित अन्य ने पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। दोनों गार्डों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि चुनौती पूर्ण कार्य को करने में डर तो लगा लेकिन बाद में विश्वास बढ़ गया। मंडल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पृथ्वी राज ने बताया कि रेलवे महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार काम रही हैं। इसके मद्देनजर पहली बार महिला गार्ड को ट्रेनों के परिचालन की जिम्मेदारी दी गई। गया से पीडीडीयू जंक्शन तक के लिए दो मालगाड़ी लेकर पूर्व मध्य रेलवे की पहली महिला गार्ड सुधा कुमारी, प्रशिक्षु पायल रानी तथा ज्योतिका कुमारी व प्रशिक्षु रीतु रेखा शाह पहुंची हैं। पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में महिलाओं ने अत्यंत साहस का परिचय देते हुए कुशलता पूर्वक ट्रेनों का परिचालन किया है। वह अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। बताया कि डीआरएम पंकज सक्सेना ने महिलाओं को दिन में ड्यूटी देने का निर्देश दिया है।
02. गार्ड बनने के लिए महिलाओं ने किया है संघर्ष
अमर उजाला ब्यूरो
पीडीडीयू नगर। पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्र में कदम रखने वाली महिला गार्डों ने लंबा संघर्ष किया है। परिवार, समाज से संघर्ष करते हुए चुनौती पूूर्ण क्षेत्र को चुना है। बिहार पीसीएस की तैयारी कर रही ज्योतिका पांडेय और रितु रेखा सहाय का चयन रेलवे में हो गया। पहली बार मालगाड़ी का गार्ड बनने की सूचना मिली तो एक झटके में परिवार वालों ने मना कर दिया लेकिन मनाने पर वे मान गए और उन दोनों ने भी चुनौती के रूप इस जाब को स्वीकार किया। बताया कि वे अभी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी है।
प्रशिक्षु गार्ड ज्योतिका पांडेय अपने किसान पिता रमेश पांडेय की बड़ी बेटी है। पटना जिले के विक्रम पाली में रहते हुए उसने रेलवे गार्ड का फार्म भरा और नौ अप्रैल को उसका सेलेक्शन हो गया। प्रशिक्षण के बाद 17 जून को पहली बार उसने दुर्गावती से मुगलसराय तक मालगाड़ी लाई थी लेकिन बुधवार को पहली बार पूरी जिम्मेदारी के साथ गया से पीडीडीयूनगर ट्रेन लेकर पहुंची। इसी तरह की कहानी रितु रेखा शाह की भी है। बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी रितू के पिता रामनरायन शाह ज्वेलरी शाप चलाते हैं। रेखा के बाद छोटी बहन और एक भाई है। तैयारी के दौरान रेखा ने रेलवे का फार्म भरा और गार्ड के रूप में सेलेक्शन हो गया। पहली बार मालगाडी लेकर चलने की बात आई तो मां रेेेखा ने मना कर दिया लेकिन पिता ने समझाया और हौसला बढ़ाया तो वह मालगाड़ी लेकर आई है।