इलिया। स्थानीय कस्बा स्थित प्राचीन तालाब का पानी गंदा हो जाने से महिलाओं को छठ पूजा करने के लिए अन्य गांवों के तालाबों में जाना पड़ रहा है। क्षेत्र की सबसे बड़ी आबादी वाले गांव का सार्वजनिक तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ग्रामीणों ने तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। इस पर उच्च न्यायालय ने तहसीलदार को तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने व तालाब में बह रहे गंदे पानी को तत्काल बंद कराने का आदेश दिया था। बावजूद इसके आज तक तालाब को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि तालाब मे कूड़ा करकट फेंकने से इसका पानी दूषित हो गया है। पूरे गांव के नाले का गंदा पानी भी इसी तालाब में बहाया जा रहा है जबकि तालाब के समीप ही अंगद बाबा का प्राचीन मंदिर है। यहां गांव के लोग दर्शन पूजन करने आते हैं। क्षेत्र की महिलाएं इसी तालाब में छठ पूजा भी करती हैं। जिला प्रशासन द्वारा ध्यान न दिए जाने से इस अति प्राचीन तालाब का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहुंच गयाहै। गांव के लोगों ने तहसील प्रशासन से सूचना अधिकार के तहत इस बाबत जानकारी भी मांगी लेकिन तहसील प्रशासन सूचना देने में हीला हवाली करता रहा। ग्रामीण विजय कुमार, दशरथ केसरी, मनोज, श्यामलाल आदि ने चेतावनी दी है कि शीघ्र ही तालाब को अतिक्रमणमुक्त कर इसमें गंदे पानी का बहाव नहीं रोका गया तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।