शिकारगंज। क्षेत्र के कुंडा हेमैया गांव के पास सोमवार की सुबह चंद्रप्रभा नदी के किनारे सड़क पर घूम रहे मगरमच्छ को देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे चकिया रेंज के वनकर्मियों की टीम ने जाल के सहारे मगरमच्छ को अपने कब्जे में ले लिया तथा उसे लतीफशाह बीयर के जलाशय में छोड़ दिया। वन कर्मियों ने बताया कि मगरमच्छ की लंबाई लगभग नौ फीट थी।
चंद्रप्रभा नदी और हेमैया बंधी का क्षेत्र आपस में सटा हुआ है। इनके बीच कुंडा हेमैया गांव स्थित है। चंद्रप्रभा नदी के कई जगहों पर मगरमच्छ देखे जाते हैं। जिसके चलते नदी के आस-पास के क्षेत्रो में कई बार मगरमच्छ नागरिकों पर हमला कर चुके हैं। भोजन की तलाश में मगरमच्छ नदी से निकलकर रात में आस-पास के गांवों में चले जाते हैं। सोमवार को सुबह कुंडा हेमैया गांव के पास सड़क पर मगरमच्छ देखकर नागरिकों में दहशत है। सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों के साथ चकिया रेंजर ताराशंकर यादव ने जाल से घेराबंदी करके मगरमच्छ को किसी तरह पकड़ लिया। तब जाकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। इस दौरान वन दरोगा टीपी सिंह, अखिलेश चौबे, जयप्रकाश, अंबुज, जोगिंदर, जसवंत, रामअशीष मौजूद थे।
चकिया। काशी वन्य जीव प्रभाग के विस्तृत वान क्षेत्र में स्थित मूसाखाड़ जलाशय में मगरमच्छों की बड़ी कालोनी है। जिसमें बड़ी तादात में मगरमच्छ निवास करते हैं। साथ ही बांधो से पानी खुलने पर मगरमच्छों के बच्चे कर्मनाशा तथा चंद्रप्रभा नदियों में बहकर चले आते है। जिसके चलते चंद्रप्रभा नदी के निचले क्षेत्र के दहो में कई छोटी कालोनियां विकसित हो गई हैं। भोजन की तलाश में आने वाले मगरमच्छ नागरिकों पर भी हमले करते रहे है। वन विभाग मगरमच्छों को नियंत्रित करने के लिए तमाम उपाय कर चुका है लेकिन मगरमच्छों की संख्या को नियंत्रित करने में सफल नहीं हुआ है।
मूसाखाड़ बांध में बाड़ोबीर पहाड़ी की तलहटी में मगरमच्छों की बड़ी कालोनी है। जिसमें मगरमच्छों की बड़ी आबादी निवास करती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये मगरमच्छ मछली तथा पशुओं का गोबर खाकर जीवन-यापन करते हैं। मूसाखाड़ बांध का क्षेत्र काफी बड़ा है तथा यहां मगरमच्छों को आहार सहज ही उपलब्ध है। इसलिए मगरमच्छ बांध की कालोनी को छोड़कतर दूसरी जगह नहीं जाते। लेकिन बांध का पानी खोलने के दौरान पानी के तेज बहाव से मगरमच्छों के बच्चे नदियों के जरिये मैदानी क्षेत्र में भी चले आते है। कर्मनाशा नदी के तटवंध उंचा होने के कारण मगरमच्छ नदी की सीमा में ही रहते हैं।
चंद्रप्रभा बांध में वैसे तो मगरमच्छों की कोई स्थायी कालोनी नहीं है लेकिन कर्मनाशा नदी के जरिए चंद्रप्रभा नदी के कई दहो में मगरमच्छों के आशियाने बन गए हैं। इन आशियानों में उनके आहार का कोई ठोस प्रबंध नहीं है। इसलिए मगरमच्छ आस-पास के गांवों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छों एवं मानव के बीच संघर्ष जारी है। चंद्रप्रभा नदी का तटबंध नीचा होने के कारण भी मगरमच्छ आस-पास के गांवो में आ जाते है। विजयपुरंवा गांव में दो वर्ष पूर्व मगरमच्छ के हमले में एक नागरिक की मौत हो गई थी। वन विभाग ने मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया था। चंद्रप्रभा नदी के मगरमच्छों को पकड़कर चंद्रप्रभा या मूसाखाड़ बांध में छोड़ने की कवायद के तहत वन विभाग नदी में विशाल पिजड़ा तक लगा चुका है। लेकिन मगरमच्छों को काबू करने में सफल नहीं हो पाया है।
चंद्रप्रभा नदी के छिछला होने के कारण मगरमच्छ रिहायशी इलाके में प्रवेश कर रहे है। इसलिए नदी के किनारे के गांवो के नागरिकों को सर्कतता बरतने की जरूरत है।
गोपाल ओझा प्रभागीय वन्यजीव अधिकारी, रामनगर