पीडीडीयू नगर। साफ-सफाई के लिए प्रदेश के सभी नगर निकायों में वर्ष 2017 से स्वच्छता ऐप की सुविधा दी गई। इस ऐप के माध्यम से लोग आसपास फैली गंदगी की शिकायत फोटो के साथ ऑनलाइन कर सकेंगे और नगर निकाय प्रशासन उसी के आधार पर समस्या का निदान करेगा। मगर पालिका प्रशासन की लापरवाही से यह ऐप छह महीने से काम ही नहीं कर रहा है। पालिका के कर्मचारी तकनीकी खराबी बता कर पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
जिले में प्रतिदिन लगभग 50 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। गलियों और मुहल्लों में पड़े कूड़े को सफाईकर्मी नहीं उठा रहे हैं तो इसके त्वरित निस्तारण के लिए पीडीडीयू नगर पालिका में जनवरी 2017 से स्वच्छता ऐप की शुरुआत की गई। आरंभ में काफी संख्या में लोग इससे जुड़े और सफाई को लेकर अच्छी-खासी संख्या में इस पर शिकायत भी आई। इसके बाद धीरे-धीरे लोगों का इससे मोह भंग होने लगा। क्योंकि शिकायत के बाद भी साफ-सफाई की व्यवस्था में विशेष सुधार नहीं दिखा। आलम यह कि अब ऐप ही तकनीकी खराबी से छह माह से बेकार है।
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खाली जमीन पर फेंकते हैं कूड़ा
जनपद के सभी चार निकायों में कूड़े के निस्तारण के लिए अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है। पीडीडीयू नगर में ही प्रतिदिन 35 से 37 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इस कूड़े को नगर से सटी खाली पड़ी नगर पालिका और पीडब्ल्यूडी की जमीन पर फेंका जाता है। कुछ दिन कूड़ा फेंके जाने के बाद जमीन को मिट्टी से ढंककर उस पर फिर से कूड़ा फेंकना आरंभ कर दिया जाता है। कई वर्षों से कूड़ा निस्तारण की यही व्यवस्था चली आ रही है।
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भीतरी हिस्सों तक नहीं पहुंचती कूड़ा गाड़ी
नगर पालिका की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना चल रही है। इसमें सफाईकर्मी कूड़े की गाड़ी लेकर घर-घर से कूड़ा एकत्र करते हैं। वे गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग डिब्बों में एकत्र करते हैं। इस योजना में शिकायत यह मिलती है कि कूड़ा एकत्र करने वाले वार्डों के भीतरी हिस्सों तक नहीं जाते। इससे कई घरों के लोग कूड़े को सड़क पर ही फेंक दिया करते हैं।
यही नहीं नगर पालिका का दावा है कि नगर के सभी वार्डों में एक बार फागिंग करा दी गई है। शीघ्र ही दूसरी बार फागिंग कराई जाएगी। वहीं लोगों का दावा है कि मच्छरों पर फागिंग का कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है। इनकी संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
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स्वच्छता ऐप की तकनीकी खराबी दूर करने को शासन को पत्र लिखा जा चुका है। कूड़ा निस्तारण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलने के बाद उस पर सालिड वेस्ट सेमिग्रेशन प्लांट लगाकर कूड़े का निस्तारण व उसे उपयोगी बनाया जाएगा। -रोली गुप्ता, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद।