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ईमाम हुसैन की याद में निकला चेहल्लुम का जुलूस

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दुलहीपुर। इमाम हुसैन की 10 वीं मोहर्रम सन 61 हिजरी में शहादत के बाद उनके घर वालों, औरतों और बच्चों को उस वक़्त के दुर्दांत बादशाह यजीद ने कैद कर लिया था। कैद से रिहाई मिलने के बाद इमाम हुसैन की बहन जैनब और उनके घर वालों ने कर्बला पहुंचकर इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों का चेहल्लुम मनाया था।
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उसकी याद में क्षेत्र के जाफरी स्ट्रीट स्थित इमाम बारगाह हकीम साहब से अलम व जुल्जनाह का जुलूस उठाया गया। जुलूस में अंजुमन सज्जदिया असगरिया के नौजवानों ने सीनाजनी की। जुलूस अपने क़दीमी रास्तों से होता हुआ इमाम बारगाह आगा नजफ़ अली साहब पहुंचा, जहां तकरीर हुई। इसे अलहाज समर हसन हुसैनी साहब ने खेताब फरमाया। इसके बाद जुलूस इमामबाड़ा से होता हुआ जीटी रोड पहुंचा जहां अंजुमन के नौजवानों जंजीरी मातम किया। अंत में जुलूस अपने क़दीमी रास्तों से होता हुआ दुलहीपुर कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। सीओ सदर प्रदीप सिंह चंदेल, कोतवाल शिवानंद मिश्रा व दुलहीपुर चौकी प्रभारीएडी खान हमराहियों के साथ मुस्तैद रहे। जुलूस में अंजुमन के सेक्रेटरी सैयद यासिर हैदर जाफरी, अशफ़ाक़ हैदर जाफरी, लईक रजा जाफरी, इम्तेयाज हैदर जाफरी, शौकत जाफरी, मकसूद हसन, मुज्जमिल हुसैन, राहिब जाफरी, फ़ैजी जाफरी, शहंशाह हुसैन, दानिश, शम्स हैदर उपस्थित रहे।
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