पीडीडीयू नगर। बाबा विश्वनाथ की नगरी से सटे चंदौली के नगरीय इलाकों में सड़कों पर विचर रहे छुट्टे पशु यात्रियों के लिए खतरे का सबब बने हुए हैं। प्रतिदिन तीन से चार लोग पशुओं की वजह से चोटिल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके नगर पंचायत प्रशासन सड़कों पर पशुओं को खुला छोड़नेे वाले पशुपालकों पर जुर्माना लगा सका है और न ही काउ कैचर की व्यवस्था हो सकी है। पशुओं की रक्षा का दंभ भरने वाली स्वयं सेवी संस्थाएं भी संसाधन विहीन होने का रोना रो रहे हैं।
पालिका और पंचायत प्रशासन लगातार घुमंतू पशुओं से निजात दिलाने का आश्वासन देता है लेकिन एक वर्ष बाद भी सड़कों पर स्थिति जस की तस है। जिले का सबसे बड़ा नगर पीडीडीयू नगर है। रेलवे ओवरब्रिज से सुभाष पार्क तक दस से 12 साड़ सड़क पर घूमते रहते हैं। सबसे खतरनाक स्थिति तो कोतवाली के सामने की है। सब्जी मंडी में सब्जी खरीदते समय कब साड़ हमला कर दे कहा नहीं जा सकता है। इसी तरह चकिया तिराहा से अलीनगर के बीच भी एक दर्जन पशु विचरते रहते हैं। यही हाल चंदौली, चकिया और सैयदराजा में भी है। नगर में पशुओं की रक्षा के नाम पर दो से तीन एनजीओ काम कर रहे हैं, पशुओं की देख भाल की जिम्मेदारी वे भी नहीं उठा रहे हैं। अभी दो दिन पहले चंदासी में पशु को बचाने के चक्कर में बाइक सवार युवक पलट गया और गंभीर रूप से जख्मी हो गया। यदि एक माह की स्थिति देखे तो जीटी रोड पर पशुओं को बचाने के चक्कर में बीस से अधिक बार वाहन पलट चुके हैं और लोग जख्मी हो चुके हैं। इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष संतोष खरवार ने कहा कि घुमंतू पशुओं को रोकने की व्यवस्था की जा रही है।