चंदौली। देश को टीबी से मुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। एक वर्ष में टीबी के प्रसार को रोकने, मरीजों को पोषण युक्त भोजन देने पर बीस लाख रुपये खर्च हो गए लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ गई। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष अक्तूबर तक 472 रोगी ज्यादा पाए गए हैं। ऐसे में 2025 तक टीबी मुक्त भारत का अभियान की सफलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
केंद्र सरकार की ओर से 2025 तक क्षय रोग मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी मुक्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है। एक वर्ष में अभियान पर बीस लाख रुपये खर्च किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों के माने तो किसी भी व्यक्ति को 15 दिन से अधिक समय तक खांसी आए तो, तत्काल पास की अस्पताल पर पहुंचकर जांच करना चाहिए। टीबी मरीजों को किसी भी सरकारी केंद्र पर जांच के साथ-साथ दवा भी मरीज को निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यहीं नहीं इसके अलावा खान-पान के लिए भी 500 रुपये प्रतिमाह मरीज को उपलब्ध कराए जाते हैं। नवंबर माह से यह रकम बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दी गई है। बावजूद इसके मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। जिले में वर्ष 2023 में जनवरी से दिसंबर तक 3778 मरीज मिले थे। इसमें दवा खाने पर 3574 मरीज स्वस्थ हुए थे। पिछले वर्ष अक्तूबर माह तक 3192 मरीज मिले थे। वहीं इस वर्ष 31 अक्तूबर तक 3664 मरीज मिले हैं। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 472 अधिक है। इस वर्ष अब तक 1817 मरीज ठीक हुए। वही 2219 मरीज का इलाज चल रहा है। जिले में सबसे ज्यादा नियामताबाद ब्लॉक में एक हजार मरीज मिले हैं। वहीं चकिया, सकलडीहा और चंदौली ब्लॉक में मरीजों की संख्या ज्यादा है।
जिले में 80 हैं एमडीआर मरीज
टीबी मरीज दवा सेवन में अनियमितता न बरते, इसके लिए टीमों का गठन किया जाता है। चिकित्सक के परामर्श के अनुसार मरीज उतने समय तक दवा का सेवन नहीं करते हैं और बीच में दवा छोड़ देते हैं तो उन्हें फिर से संक्रमित होने की आशंका रहती है। ऐसे मरीजों को एमडीआर कहा जाता है। एमडीआर सामान्य टीबी रोगियों की अपेक्षा अधिक खतरनाक होते हैं। जिले में एमडीआर मरीजों की संख्या 80 है।
जिले में 93 फीसदी है मरीजों के स्वस्थ होने की दर
जनपद के स्वास्थ्य क्षय रोग उन्मूलन के लिए पूरी तरह से विशेष अभियान चलाकर रोकथाम का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन 3 वर्ष के आंकड़ों को देखें तो कहीं ना कहीं मरीजों की संख्या में इजाफा ही हुआ है। जिले में वर्ष 2022 में 2941 मरीज मिले थे। वही 2023 में जनवरी से दिसंबर तक 3778 मिले, लेकिन अक्टूबर तक लगभग 34,10 मरीज मिले थे। वहीं जनवरी से दिसंबर तक 3574 ठीक हो चुके हैं। वहीं 2024 में जनवरी से अक्टूबर तक 3664 मरीज टीबी के पाए गए, लेकिन इसमें से 1817 मरीज ठीक हो चुके हैंं और वही 2219 मरीजों की दवा चल रही है। विभाग अधिकारियों को दवाएं ठीक होने का दर भी 93 प्रतिशत से अधिक है। वर्ष 2022 में 2941, वर्ष 2023 में 3608 और वर्ष 2024 में जनवरी माह से अक्टूबर तक 3192 मरीज को 500 रुपये दिए गए हैं, ताकि मरीज अपनी सेहत पर खर्च कर सके।
कोट-
टीबी की रोकथाम के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। जांच के बाद मरीज मिलने पर उन्हें निःशुल्क दवाई उपलब्ध कराई जाती हैं। जिले में मरीजों के स्वस्थ होने की दर 93 प्रतिशत से ज्यादा है। - डॉॅ. राजेश कुमार, जिला क्षय अधिकारी, चंदौली