मुगलसराय। कक्षा आठवीं तक के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की कवायद भले की जा रही हो मगर हकीकत से बहुत दूर है। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को बैठने के लिए न तो फर्नीचर है और न ही किताबें मुहैया हैं। इस भीषण गर्मी में बिजली का काम पूरा नहीं होने के चलते बच्चे कक्षाओं में पसीना बहा रहे हैं। यह तब है जब शासन से लेकर शिक्षा विभाग निजी कांवेंट स्कूलों से इन विद्यालयों को टक्कर देने की जुगत में है।
इसी उद्देश्य से इस साल जिले में निजी माध्यम से अंग्रेजी स्कूलों की तरह 50 बेसिक स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू कराई गई। मगर इन स्कूलों में भी संसाधनों का अभाव है। स्कूल खुलने के बाद भी पाठ्य पुस्तक नहीं मिली है। इससे पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। शिक्षा विभाग की मानें तो बच्चों केे जुलाई से पहले किताबें भी नहीं मिल पाएंगी। वजह अभी किताबों का प्रकाशन भी नहीं शुरू हुआ है। बिजली कनेक्शन और फर्नीचर की भी व्यवस्था नहीं है। इससे बच्चे टाट पट्टी पर बैठ कर बच्चे पढ़ रहे हैं।
जिले में 997 प्राथमिक और 474 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। यहां तीन लाख 57 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मुफ्त किताबें, मिड डे मील, मुफ्त स्कूली ड्रेस, बैग, जूता मोजा, स्वेटर वितरित किया जा रहा है। लगातार इसका प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है और स्कूल चलो अभियान चलाकर छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को अवश्य रूप से स्कूलों में प्रवेश के लिए अभिभावकों को प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन बुनियादी सुविधाओं से ही बच्चे दूर हैं। एक वर्ष पहले हाईकोर्ट ने परिषदीय विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था करने को कहा था लेकिन प्राथमिक विद्यालय में बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। जिले के 647 विद्यालय विद्युतीकरण से वंचित हैं और गर्मी में पसीने टपकाते हुए पढ़ाई कर रहे हैं। इस संबंध में एडी बेसिक विजय शंकर मिश्र ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। किताब न मिलने पर अध्यापकों को पुरानी किताबों से पढ़ाई कराने का निर्देश दिया गया है। किताबों के लिए कोटेशन कराकर जल्द उपलब्ध कराने की तैयारी है। ताकि बच्चों का नुकसान न हो।