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बच्चों के नृत्य-लय-ताल देखकर निहाल हुए लोग

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पड़ाव। सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल के वार्षिकोत्सव सृजन में बच्चों ने खूब धमाल मचाया। रंग बिरंगे परिधानों में बच्चों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किये। वहीं भारतीय संस्कृति एवं त्योहारों का मनोरम दृश्य प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। इसके अलावा नाटक के माध्यम से भारत से गिरमिटिया मजदूर के रूप में विदेश गए अप्रवासी भारतीयों के दर्द और उनके संघर्ष की गाथा के साथ सशक्त भारत की तस्वीर लोगों को दिखाई। बच्चों के कार्यक्रम को अभिनेता मुकेश खन्ना ने भी सराहना की। इसके अलावा भारत की होली, वर्षा नृत्य, आदिवासी नृत्य, कौव्वाली प्रस्तुत कर उपस्थित अभिभावक और लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि सिने अभिनेता मुकेश खन्ना, विशिष्ट अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति डॉ. बीएम शुक्ला, बीएचयू एमएमवी की पूर्व प्राचार्य डॉ. अन्नपूर्णा ने संयुक्त रूप से दीप जला कर किया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत हे शिवशंकर आ जाओ मेरे आंगन में सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर विद्यालय के अध्यक्ष दीपक बजाज ने कहा कि अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध व्यक्तियों की प्रेरणा बाल मन को सदैव प्रभावित करता है। प्रबंधक निदेशक मनोज बजाज ने कहा कि देश के विकास के लिए और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास होना जरूरी है। इस मौके पर जैपुरिया कारपोरेट समूह की वाइस प्रेसिडेंट बीना नायर, जीएम अनिर्मन भट्टाचार्य, एजीएम ज्योति, संजय अग्रवाल, श्यामसुंदर बजाज, सनिल सचदेवा, अनिल जाजोदिया, अनिल सिंह प्रधानाचायर्च आशीष सक्सेना, प्रियंका मुखर्जी रही।
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पड़ाव। महाभारत में भीष्म पितामह बनकर अभिनय का लोहा मनवाने वाले और बच्चों केे बीच शक्तिमान बनकर लोकप्रिय हुए सिने अभिनेता मुकेश खन्ना रविवार को जैपुरिया स्कूल में बच्चों, अभिभावकों एवं मीडिया से एक साथ रूबरू हुए। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे बच्चों का बचपना न छीनें और न ही उनपर अनावश्यक दबाव बनाएं। बच्चों को खुलकर जीने के लिए अभिभावकों से अपील की।
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इस दौरान उन्होंने प्रेस से मिलिए कार्यकम में कहा कि सभी बच्चों का सर्वांगीण विकास आवश्यक है। बच्चों का विकास तभी होगा जब बच्चे बच्चों की तरह रहें। आज बच्चों से बचपन छीना जा रहा है। बच्चों के लिए पढ़ाई जितनी जरूरी है, उतना ही खेल जरूरी है। मोबाइल, टीवी और इंटरनेट बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित कर रहा है। बच्चों को ह्वाटसएप और चैटिंग से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बजट के अभाव में बच्चों की फिल्में नहीं बन पा रही हैं। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। साथ ही बच्चों के लिए ऐसी फिल्म बननी चाहिए जो मारधार, अपराध की दुनियां से दूर हो। बच्चों केे सवाल के जवाब में परीक्षा के डर पर कहा कि बोर्ड परीक्षा से अधिक जरूरी जिंदगी की परीक्षा में पास होना है। कहा कि मैने तो भरपूर बचपन जिया है और बच्चों को बचपना देने की कोशिश की है। जिंदगी के बारे में कहा कि मेरी लाइफ विदाउट वाइफ है। आज की राजनीति पर कहा कि आज की राजनीति महाभारत के शकुनी और धृतराष्ट से भी अधिक घातक है। राजनीति में जाने की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया।
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