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रामहि केवल प्रेम पियारा

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कंदवा। रामहि केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जान निहारा। भगवान को प्रेम सर्वाधिक प्रिय है। प्रेम से अर्पित पत्ते व पुष्प भगवान को सहज ही स्वीकार हैं। भगवान साधन अथवा साध्य नहीं केवल प्रेम से मिलते हैं।
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ये बातें क्षेत्र के गोरखा हनुमान मंदिर परिसर में चल रही पांच दिवसीय श्रीराम चरित मानस कथा के पहले दिन गुरुवार की निशा भरहुलिया से पधारी मानस मंजरी विभा उपाध्याय ने कहीं। उन्होंने भक्तिमति शबरी, राम के जीवन व निश्छल प्रेम पर प्रवचन दिया। कहा कि भक्तों के दिल का प्रेमबंधन ही भगवान को प्रेमपाश से बांधने में सक्षम है। आत्मिक शांति के लिए शबरी के जीवन चरित्र को अपनाने की जरूरत है। मन में निश्चल प्रेम नहीं होने से श्रीराम की प्राप्ति नहीं हो सकती। राम को प्राप्त करने के लिए प्रेम को आधार बनाना ही होगा। जौनपुर से आए मानस प्रवक्ता पं. रामेश्वरानंद ने कहा कि वर्तमान में आपस के प्रेम का अभाव हो गया है। रामभक्त हनुमान जी ने सूक्ष्म रूप धारण कर कई बड़े कार्य किए। श्री हनुमान का चरित्र संपूर्ण मानव जगत के लिए आदर्श है। हनुमान जी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो बल, बुद्धि व विद्या तीनों प्रदान करते हैं। कलियुग में हनुमान की भक्ति से ही मानव का कल्याण हो सकता है। प्रभु श्रीराम ने धरती पर जितने भी लक्ष्य लेकर अवतार लिया, उन्हें हनुमान जी के सहयोग के बिना पूर्ण कर पाना असंभव था। कथा श्रवण करने वालों में सतीश सिंह, हरीश सिंह, कपिलदेव उपाध्याय, जामवंत सिंह, सियाराम यादव, शेषनारायण सिंह, पप्पू सिंह, अरविंद उपाध्याय, गोपाल उपाध्याय, नागेंद्र सिंह मौजूद रहे।
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