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मानव को संकट से बचाने का एकमात्र साधन है भागवत

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कमालपुर। क्षेत्र के महेशी गांव स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत भागवत कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान कथा का श्रवण करने के लिए भारी संख्या में आस-पास के गांवों के ग्रामीण जुटे रहे। बिहार प्रांत के गया स्थित जगतगुरू आश्रम के पीठाधीश्वर व्यंकटेश पुवराज स्वामी ने कथा का श्रवण कराते हुए शिव द्रोही मम दास कहावा-सो नर मोही सपनेहु नहीं भावा की चौपाई का वर्णन किया।
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कहा कि मानव को ईर्ष्या, द्वेष, जलन का परित्याग कर संसार के समस्त जीवों पर दया करनी चाहिए। वहीं असहायों व गरीबों का यथासंभव सहयोग करना ही आध्यात्म और मानव संस्कृति है।पवित्र वाणी बोलना ही मानव का धर्म होता है। वर्तमान में पूरे विश्व में मानव पर संकट खड़ा हो गया है। इसके निदान के लिए मात्र एक साधन भागवत कथा का आयोजन ही है। कहा कि स्वास्थ्य हर मानव की अमूल्य धरोहर है। इसलिए ऋषियों और मनीषियों द्वारा खोजी गई वनौषधि का उचित सेवन करने के साथ दिनचर्या सही रखें। कथा के दौरान आए प्रदेश स्वास्थ्य समयिति केअध्यक्ष व दार्शनिक वैद्य हिरावन महराज ने भी आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन के लाभ के बारे में बताया। इस दौरान राजनारायण मिश्रा, झब्लू सिंह, देवंद्र मौर्या, छोटेलाल, रामनरेश गिरी, पंडित उमेश मिश्र, रविंद्र प्रताप सिंह, रामधनी यादव, राणा सिंह, नित्यानंद त्रिपाठी, महेंद्र पांडेय मौजूद रहे।
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