केस एक- कम्हरिया गांव निवासी मखंचू दूबे के गाय को पशु चिकित्सक ने तीन नवंबर को कागज पर सीमेन चढ़ाना दिखाया है। जबकि 10 दिन पूर्व ही मखंचू दूबे की गाय ने बच्चा दिया है। मखंचू का कहना है कि कोई सीमने चढ़ाने भी नहीं आया था।
केस दो- अस्पताल के चिकित्सक व पशुधन प्रसार अधिकारी ने 31 अगस्त को कोरमी गांव के मनोज राय की दो गायों और उनके नाबालिक पुत्र आदर्श राय की भैंस को सीमेन चढ़ाना दर्ज किया है। जबकि मनोज राय और आदर्श राय का कहना है कि न तो मेरी गायों को सीमेन चढ़ाया गया है और न ही मेरे घर कोई भैंस है।
केस तीन-असना गांव निवासी पिंटू बिंद के बकरे को पशु चिकित्सकों ने कागज पर बधिया कर दिया है। लेकिन पिन्टू बिंद का कहना है कि उसके घर में आज तक कभी बकरे बकरियां नहीं पाली गई। ऐसे में कैसे कोई बकरे को बधिया कर दिया।
अमर उजाला ब्यूरो
कंदवा। खेती किसानी से लेकर पशुपालकों को रोजगार की दृष्टि से सरकार की ओर से तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्हें ऋण की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है ताकि पशुपालक रोजगार कर सकें। पशु चिकित्सालयों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैँ मगर सरकार की मंशा पर पशुपालन विभाग के अधिकारी ही पानी फेर रहे हैं। पशु चिकित्सक अस्पताल में ही बैठकर ग्रामीणों एवं पशुपालकों का मनमाने और फर्जी तरीके से नाम कागज पर भरकर घालमेल कर रहे हैं। सरकार की ओर से बंध्याकरण के टीके और गर्भाधान के लिए मिलने वाली दवाईयों और सीमेन को पार लगा रहे हैं। यह हाल है बरहनी ब्लाक के अमड़ा पशु चिकित्सालय का।
अमड़ा पशु चिकित्सालय में यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। पशु चिकित्सकों का कारनामा सुनकर कोई हैरान हो सकता है। पशु चिकित्सकों ने अमड़ा गांव के जिस मखंचू दूबे की गाय को अपने रजिस्टर में 10 दिन पहले सीमने चढ़ाना दिखाया है उनकी गाय ने 10 दिन पहले ही बच्चा जना है। वहीं कोरमी गांव के मनोज राय और आदर्श के गाय और भैंस को सीमेन चिकित्सकों ने कागज पर चढ़ा दिया जबकि उनके पास भैंस है ही नहीं। यही हाल असना के पिंटू बिंद के यहां है। चिकित्सकों ने उसके बकरे को बंध्याकरण कर दिया जबकि उसके यहां कोई बकरा ही नहीं है। यह तो सिर्फ ब्लाक के तीन गांवों का मामला है। ऐसा ही खेल जिले के सभी ब्लाकों के पशु अस्पतालों में चल रहा है। हाल तो यह है कि पशु चिकित्सकों का यह खेल लंबे समय से चल रहा है और जिम्मेदार बेखबर हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को इसकी भनक तक नहीं है।
पशु चिकित्सालय अमड़ा के अभिलेखों पर नजर डालें तो एक ही माह में एक ही किसान के कभी गाय तो कभी भैंस को सीमेन चढ़ाया गया है तो कभी बकरे का बंध्याकरण किया गया है। सूत्रों का कहना है कि बंध्याकरण के लिए 10 रुपये की रसीद कटती है और सीमेन के लिए 30 रुपये देना पड़ता है। बाजार में एक सीमेन की कीमत 150-200 रुपये है। पशु चिकित्सक सीमेन को बाजार में निजी पशु दवा की दुकानों पर बेच दिया जाता है। इससे न सिर्फ सरकार की मंशा का पलीता लग रहा है बल्कि पशुपालकों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कोट...
पशुओं के सीमेन चढ़ाने और बंध्याकरण के टीके लगाने की इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। संबंधित अस्पताल के चिकित्सक ही इस संबंध में जानें। एसपी पांडेय, मुख्य पशु चिकित्सक।