टांडाकला। गंगा के जलस्तर में लगभग 10 दिनों से शुरू हुआ बढ़ाव लगातार जारी है। शुक्रवार और शनिवार को बढ़ाव की रफ्तार तीन से चार सेमी प्रति घंटा रही। नदी के जलस्तर में इस बढ़ाव से तटवर्ती इलाके के ग्रामीण भयभीत हो गए थे। इसके बाद रविवार को बढ़ाव की रफ्तार घटकर एक सेंटीमीटर प्रति घंटा रहने से उन्हें कुछ राहत अवश्य मिली है। बावजूद इसके बढ़ाव जारी रहने से गंगा धीरे- धीरे खतरे के निशान की ओर बढ़ रही हैं। 7
केंद्रीय जलबोर्ड के अनुसार रविवार की शाम पांच बजे गंगा का जल स्तर 53.950 मीटर रिकार्ड किया गया। यहां खतरे का निशान बिंदु 57.615 मीटर पर है। करीब एक महीने से गंगा के जलस्तर में हो रहे उतार- चढ़ाव को लेकर जिला प्रशासन के साथ ही तटवर्ती लोगों की भी बेचैनी बढ़ गई है। शुक्रवार व रविवार को सुबह से ही एक सेंटीमीटर की रफ्तार बढ़ाव दर्ज की गई। वहीं गुरुवार व शनिवार को चार सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ाव दर्ज की गई थी। बुधवार को तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे से बढ़ाव दर्ज किया गया था जबकि इसके पहले भी बढ़ाव की रफ्तार बढ़ती- घटती रही है। पल-पल बदल रहे नदी के तेवर ने खतरे का संकेत भी दे दिया है। गंगा नदी में पिछले साल आई बाढ़ की तबाही झेल चुके लोग इस बार भी सहमे हुए हैं। गंगा नदी का दबाव सबसे ज्यादा सरौली, बड़गांवा, भूसौला, हसनपुर ,तिरगांवा, महमदपुर, सरौली के बीच होता है। वही बाढ़ विभाग की लापरवाही को लेकर क्षेत्रीय लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कहा जा रहा है कि अगर इस बार भी नदी ने उग्र रूप दिखाया तो भारी तबाही से बचना मुश्किल होगा क्योंकि बाढ़ नियंत्रण विभाग का कोई भी कर्मचारी अभी तक क्षेत्र का जायजा लेने नहीं पहुंचा है।