मुगलसराय। संतान के दीर्घायु की कामना से महिलाओं ने बुधवार को निराजल व्रत रखा और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की। बाद में राजा जिमूतवाहन की कथा सुनी। सरोवरतटों पर पूजन अर्चन करने वाली महिलाओं की भीड़ की वजह से यहां मेला लगा रहा। तालाब के किनारे सड़कों पर जाम की स्थिति रही।
वैसे तो व्रत की तैयारी पहले से शुरू हो गई थी। मंगलवार को ही पूजन अर्चन के लिए फल, फूल आदि की खरीददारी कर ली गई। महिलाओं ने स्नान ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लिया। बुधवार को महिलाओं ने दिनभर पूजन अर्चन की तैयारी की। दोपहर बाद दउरी में फल, फूल, धूप, दीप आदि सजाया। इसके बाद घरों से सरोवर तटों के लिए पूरे परिवार संग निकले। सरोवर तटों पर पहुंच कर कलश स्थापित की और मिट्टी के चिल्ह, सियारिन, राजा जिमूतवाहन और माता लक्ष्मी की मूर्ति तैयार की और विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद चिल्ह सियारिन की कथा सुनी। आरती उतार कर संतान के दीर्घायु की कामना की। देव मंदिरों पर भी पूजन अर्चन के लिए महिलाओं की भीड़ जुटी। नगर के मानसरोवर तालाब, आरपीएफ कालोनी तालाब, राममंदिर पोखरा, तिनकोनिया पोखरा सहित अन्य स्थलों पर भीड़ रही। इसी तरह कैलाशपुरी शिव मंदिर, शाहकुटी मंदिर, आरपीएफ कालोनी शिव मंदिर, मानसनगर, डीजल कालोनी सहित अन्य स्थलों के मंदिरों पर पूजन अर्चन के लिए महिलाएं जुटी। रेलवे कालोनियों के साथ अन्य कालोनियों से महिलाओं बैंड बाजे के साथ भी पूजा स्थल पर पहुंची। शाम चार बजे से शाम सात बजे तक सड़क पर जाम की स्थिति रही। जाम को छूड़ाने में पुलिस को पसीने बहाने पड़े। वैसे तो सुबह से उमस भरी गर्मी की वजह से महिलाओं को दिक्कत हुई लेकिन शाम को हल्की बूंदा बांदी से मौसम का पारा कुछ शांत हुआ और व्रती महिलाओं ने राहत की सांस ली।
स्नानार्थियों से पटा रेलवे स्टेशन
भीड़ को संभालने में सुरक्षा बलों के छूटे पसीने
मुगलसराय। जीवितपुत्रिका पर गंगा स्नान के लिए बनारस से वापस लौट रहे स्नानार्थियों से रेलवे स्टेशन पट गया। अत्यधिक भीड़ को संभालने में आरपीएफ और जीआरपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जीवितपुत्रिका पर बड़ी संख्या में बिहार की महिलाएं गंगा स्नान के लिए ट्रेनों में सवार होकर वाराणसी जाती हैं और स्नान के बाद वापस लौटती हैं। बिहार के बक्सर, आरा, भभुआ, सासाराम, डेहरी आनसोन सहित अन्य इलाकों से वाराणसी जाने वाली महिलाएं रात में बनारस पहुंच गई और बुधवार की सुबह वापसी में मुगलसराय चली आई और विभिन्न ट्रेनों में सवार होकर घरों की ओर लौटीं। वर्ष 2008 में स्टेशन पर अफवाह के कारण भगदड़ मच गई और 14 महिलाओं की मौत हो गई थी। सुरक्षा के लिए काफी सतर्कता बरते हुए अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी। टिकट चेकिंग पर रोक रही और सख्त हिदायत दी गई कि किसी भी कारण पर ऐन वक्त पर ट्रेनों का प्लेटफार्म न बदला जाए। मेडिकल टीम की व्यवस्था की गई थी।