चंदौली। विगत कुछ वर्षों से जनपद के किसान धान की फसल में लगने वाले लेढ़ा रोग से परेशान रहते हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष लगभग 35 फीसदी धान की फसल रोग के जद में आ गई थी। विभाग आगामी खरीफ सीजन में इस समस्या से निबटने के लिए अभियान चला रहा है। उप कृषि निदेशक का कहना है कि बीज शोधन के साथ ही कुछ जरूरी उपायों के जरिए इस रोग पर काबू पाया जा सकता है।
इस वर्ष एक लाख 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसीलिए कृषि विभाग धान की फसल को लेढ़ा रोग से बचाने में अभी से जुट गया है। उप कृषि निदेशक राजेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि लेढ़ा रोग बीज जनित रोग है। इसके लिए नर्सरी डालने से पूर्व बीज का उपचार करना जरूरी है। बताया कि नर्सरी डालने से पहले किसान दस किलो बीज में एक किलो मोटा नमक डालकर बारह घंटे छोड़ दें। इसके बाद नमक का प्रभाव कम करने के लिए बीज को पानी से धो लें। साथ ही रोपाई करने से पहले खेत में कंपोस्ट उर्वरक संग ट्राइकोडर्मा का प्रयोग कर भूमि का शोधन भी करें। जिन किसानों ने नर्सरी डाल दी उनके लिए भी भूमि का शोधन लाभदायक है। बताया कि किसान लेढ़ा रोग से प्रभावित धान के बीज को नर्सरी के रूप में प्रयोग न करें। कहा कि किसान अपने मिट्टी की जांच की करा लें इसके भी लेढ़ा रोग सहित अन्य बीमारियों के बचाव किया जा सकता है।