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जिला चिकित्सालय में दुर्व्यवस्था

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चंदौली। प्रभारी मंत्री से लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों तथा आलाधिकारियों ने कई कई बाद जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया। समस्याओं और दुर्व्यवस्थाओं से अवगत हुए। लेकिन बहुत सुधार नहीं दिख रहा है। स्थिति यह है कि चिकित्सालय में अस्थमा और गैस सहित 27 दवाएं नहीं हैं। एंटीबायोटिक भी एक माह के बाद मंगलवार की दोपहर में पहुंची। जिससे मरीज बाहर से दवा खरीद रहे हैं।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग एक हजार से बारह सौ मरीजों का पंजीकरण किया जा रहा है। जनपद के कोने-कोने से लेकर बिहार तक के मरीज अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। लेकिन विडंबना यह कि बगैर दवाओं से मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। एंटीबायटिक, अस्थमा और गैस सहित कई प्रमुख दवाएं या तो समाप्त हो चुकी हैं या समाप्ति की कगार पर हैं। एंटीबायोटिक तो एक माह से अस्पताल में नहीं थी। सीएमएस ने जब दवा की आपूर्ति करने वाली कंपनी से वार्ता की तो पता चला कि दवा विगत ग्यारह दिन पहले अस्पताल को भेजी जा चुकी है लेकिन वाराणसी और मुगलसराय में रुकी है। मंगलवार की दोपहर को दवा चिकित्सालय के स्टोर में पहुंची। वरिष्ठ फार्मासिस्ट आरके यादव कहते हैं कि 27 दवाओं के लिए महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा को पत्र भेजा जा चुका है। दवा की अनुपलब्धता की स्थिति में स्थानीय स्तर से दवा खरीदने के लिए अनुमति भी मांगी गई है। वहीं दवाओं के अभाव में मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। सीएमएस डा. उमापति दूबे कहते हैं कि अस्पताल को दवा आपूर्ति करने वाली कंपनी की लापरवाही से प्राय: ही दवाओं का अभाव हो जाता है।इस बाबत उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।
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