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Chandauli News: कवच से लैस किए गए 150 इलेक्ट्रिक रेल इंजन

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रेल इंजन में कवच लगाता मैकेनिक। स्रोत:-रेलवे
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पीडीडीयू नगर। पं. दीन दयाल उपाध्याय मंडल में 150 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को कवच प्रणाली से लैस किया जा चुका है। बृहस्पतिवार को विश्वकर्मा पूजा के मौके पर विद्युत लोको शेड में 150वें इलेक्ट्रिक इंजन में स्वदेशी कवच प्रणाली की स्थापना का काम पूरा किया गया। इससे ट्रेनों के बीच टक्कर के जोखिम को कम करने और ट्रेन परिचालन की संरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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रेलवे की ओर से विकसित कवच एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसके माध्यम से लोको पायलट को सिग्नल और निर्धारित गति के अनुपालन में तकनीकी सहायता मिलती है। निर्धारित परिस्थितियों में चेतावनी और स्वचालित ब्रेकिंग जैसी सुविधाओं के माध्यम से यह ट्रेन परिचालन की संरक्षा को मजबूत करने में सहायक है। विद्युत लोको शेड, पीडीडीयू में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच प्रणाली की स्थापना का कार्य लगातार किया जा रहा है।
बृहस्पतिवार को 150वें इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच की स्थापना पूरी की गई। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि कवच जैसी आधुनिक स्वदेशी तकनीक का विस्तार भारतीय रेल में तकनीकी आधुनिकीकरण और रेल संरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विद्युत लोको शेड की ओर से लोकोमोटिव में कवच प्रणाली की स्थापना का कार्य लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सुरक्षित एवं सुचारु ट्रेन परिचालन को और सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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इनसेट
सौ ट्रेनों का कवच के साथ हो रहा परिचालन
इस समय पीडीडीयू मंडल के अंतर्गत गंजख्वाजा-भभुआ रोड एवं सासाराम-पहलेजा सेक्शन में प्रतिदिन कवच प्रणाली से युक्त करीब 100 ट्रेनों का आवागमन हो रहा है। दोनों सेक्शन में कवच प्रणाली से सुसज्जित लोकोमोटिव के उपयोग के जरिये आधुनिक ट्रेन सुरक्षा तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।

इनसेट
इस तरह काम करती है कवच प्रणाली
कवच एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो लोकोमोटिव, ट्रैक पर लगे उपकरणों तथा स्टेशन और इंटरलॉक्ड रेलवे क्रॉसिंग गेट जैसे स्थिर स्थानों पर लगे उपकरणों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करती है। यह ट्रेन की गति, स्थिति और सिग्नल संबंधी जानकारी के आधार पर लोको पायलट को चेतावनी देती है तथा निर्धारित परिस्थितियों में स्वत: ब्रेक लगाने में सहायता करती है। इससे सिग्नल पार करने और टक्कर जैसी जोखिमपूर्ण स्थितियों से बचाव में मदद मिलती है।
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