पीडीडीयू नगर। यदि किसी आंदोलन के दौरान रेल को रोका तो नेताजी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। रेलवे रेल सेवा बाधित करने वालों पर धारा 174 के तहत मुकदमा दर्ज करेगा। इसमें दो वर्ष की सजा का प्रावधान है। चुनाव आयोग ने दो वर्ष की सजा पाए लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। रेलवे सुरक्षा के डायरेक्टर जनरल अरुण कुमार ने पूर्व मध्य रेलवे के सभी अधिकारियों को रेल रोकने पर कड़ाई से निपटने और मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
वर्तमान समय में किसी आंदोलन को धार देने के लिए रेल रोकना सबसे बड़ा हथियार बन गया है। चाहे छात्र आंदोलन हो अथवा भारत बंद का ऐलान राजनीतिक दल अथवा संगठन के निशाने पर रेलवे ही रहती है। इसी वर्ष नौ मई को एससी एसई एक्ट की समाप्ति को लेकर पूरे देश में बड़ा आंदोलन किया गया। जगह जगह ट्रेनें रोकी गई। इसी तरह दस जून को, 18 सितंबर को भी बड़े पैमाने पर रेलवे लाइन पर आंदोलन किया गया। इससे ट्रेनों का आवागमन प्रभावित हुआ। इसको देखते हुए डीजी अरुण कुमार ने शनिवार को अफसरों को ट्रेन रोकने या रेल परिचालन बाधित करने वालों के खिलाफ 174 के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। यही नहीं उन्होंने घटनास्थल से जुड़े वीडियो फुटेज आदि साक्ष्यों को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करने का निर्देश दिया। कहा कि इससे आसानी से दोषियों को सजा मिल सकेगी। सजा पाए नेता चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इससे रेलवे संचालन में बाधा पहुंचाने की प्रवृत्ति पर लगाम लग सकेगी। इस संबंध में वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त आशीष मिश्र ने बताया कि इस संबंध में निर्देश मिल चुके हैं।
174 के तहत यदि कोई व्यक्ति रेल परिचालन में बाधा उत्पन्न करता है तो यह अपराध है। इसको लेकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ ही जुर्माना से लेकर दो साल तक की सजा तक हो सकती है।
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महाराष्ट्र सहित अन्य जगहों पर रेल रोकने वालों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई हो रही है। दोषियों को सजा मिल रही है। ऐसे केस में फोटो या वीडियो फुटेज ही कनविक्शन के लिए काफी है।