चकिया। चंद्रप्रभा नदी के तट पर सिकंदरपुर स्थित एसआरवीएस डिग्री कालेज में बीटीसी प्रशिक्षुओं की ओर से काव्य समारोह का आयोजन शनिवार को किया गया। जिसमेें श्रोताओं ने काव्य पाठ का आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरूआत कवि नागेश शांडिल्य ने सरस्वती वंदना के साथ की। काव्य समारोह के पहले चरण में आए कवि डॉ. जयशंकर जय ने -लेके कन्हवां पर फावड़ा कुदाल मितवां, के माध्यम से किसानों के दर्द का बताया तो वाराणसी के कवि कुॅवर सिंह कुॅवर ने- न होती बेटियां, बेटे हमें निराश कर देते, के माध्यम से बेटियों की महत्ता को बताया। वि नागेश शांडिल्य ने - भारी-भरकम बस्ता कंधे पर लादे, स्कूल से लौटे थके मांदे सुनाकर शिक्षा व्यवथा पर कटाक्ष किया। डॉ. धर्मप्रकाश मिश्र ने-कौन कहता है कि गिद्ध भारत से लुप्त हुए, अब वे पेड़ों की बजाय कुर्सियों पर पाए जाते हैं, सुनाया। हास्य कवि चपाचप बनारसी ने - आकिस्तान-पाकिस्तान से भारत न बतिआवै, जहां भी पावै, जैसे पावै जम के बस लतियावै, सुनाकर श्रोताओं में जोश भरा। नोएडा से आये युवा कवि पंकज प्रखर ने - कुछ जयचंदों और जाफरो से भारत शर्मिंदा है, भूल न जाना इस धरती पर वीर हमीद भी जिंदा हैं, सुनाया। अंतिम कड़ी में आये कवि डॉ. अशोक राय अज्ञान ने - मुगलों का यदि इतिहास देखा जाएगा तो, जो भी आया वहीं लूट मार करने लगा, राजस्थान में जो खातिरदारी जोरदार हुई पद्मिनी के जौहर से लीला भंसाली डरने लगा, सुनाकर पद्मिनी फिल्म पर बैन लगाने की हिमायत की। सम्मेलन में एएमडी सुनील सिंह, प्रचार्य डॉ. जयदीप सिंह, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. अमित श्रीवास्तव, डॉ. भानू प्रताप राय, डॉ. अंजूलता श्रीवास्तव, डॉ. विभा पांडेय, मनोकामना शुक्ला, शंकर सिंह, हौसिला प्रसाद गुप्ता, मनोज कुमार, प्रमोद कुमार सिंह, ओमकारेश्वर मिश्र, सीयाराम, किशन, रेनू राय, शैल कुमारी आदि मौजूदरहे। अध्यक्षता चपाचप बनारसी ने और संचालन अशोक राय अज्ञान ने किया।