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स्टेबलाइजेशन तकनीक से बन रही 6 किमी लंबी सड़क

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चकिया। मिट्टी की खराब गुणवत्ता के चलते बार-बार खराब होने वाली विद्युत उपकेंद्र से गरला मोड़ तक की सड़क इस बार स्टेबलाइजेशन तकनीक से बनाई जा रही है। छह किमी लंबी इस सड़क से लतीफशाह पर्यटन स्थल को भी जाया जाता है। स्टेबलाइजेशन तकनीक से बनने वाली यह सड़क जिले की पहली सड़क है।
मुहम्मदबाद पुल से लतीफशाह पर्यटन केंद्र तथा गरला मोड़ से लतीफशाह पर्यटन केंद्र को जोड़ने वाली सड़क मिट्टी की खराब गुणवत्ता के चलते पांच वर्षों में तीन-तीन बार खराब हो चुकी है। इसलिए इस सड़क को मजबूत एवं टिकाऊ बनाने के लिए स्टेबलाइजेशन तकनीक का सहारा लोक निर्माण विभाग ले रहा है।
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ब्लैक काटन स्वायल (काली कपासी मिट्टी) होने के कारण नमी आने पर सड़क जल्दी-जल्दी खराब जाती है। मिट्टी के भौतिक और रासानिक गुणों को ध्यान में रखते हुए विद्युत उपकेंद्र से गरला मोड़ तक स्टेबलाइजेशन तकनीक के जरिए सड़क बनाने का निर्णय लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड चंदौली के विशेषज्ञों ने लिया। वर्तमान में छह किमी लंबी सड़क नई तकनीक से बनाई जा रही है। इस सड़क के निर्माण में छह करोड़ करोड़ रुपये की लागत आ रही है। सड़क का कार्य देख रहे अवर अभियंता सूचित पटेल ने बताया कि जिस मिट्टी का सीबीआर वैल्यू अधिक होता है, उस मिट्टी को सड़क निर्माण की दृष्टि से खराब माना जाता है। लतीफशाह को जोड़ने वाली सड़क की मिट्टी खराब है। इसलिए स्टेबलाइजेशन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में पूर्व की बनी सड़क को मशीन से 6 इंच तक हटा दिया जाता है तथा सीमेंट, एमल्सन, पानी एवं नई गिट्टी मिक्स कर उसे सड़क पर बिछाया जाता है। इसे भारी रोलर के जरिए दबाया जाता है। उन्होंने कहा कि सड़क बनने के बाद इस पर डीबीएम तथा बीसी का कार्य किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता मिथिलेश कुमार ने कहा कि स्टेबलाइजेशन तकनीक से बनी सड़क की गुणवत्ता अच्छी होगी तथा सड़क लंबे समय तक चलेगी। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से बनने वाली यह जिले की पहली सड़क है।
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