पीडीडीयू नगर। यदुकुल का ब्राह्मणों के श्राप से संहार होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण स्वधाम गमन कर जाते हैं। जाने के पहले अपना अंतिम समय श्रीकृष्ण उद्धव के साथ बिताते हैं। इस दौरान उद्धव ने भगवान से कई महत्वपूर्ण प्रश्न किए जिसे भागवत में उद्धव गीता कहा गया है। पूछा कि उनके चले जाने के बाद भक्त किसका आशय लेंगे तो भगवान ने कहा कि वे भागवत के प्रत्येक शब्द में विद्यमान रहेंगे। भगवान के शब्द का आश्रय मेरे दर्शन के बराबर होगा।
ये बातें नगर के एक लॉन में चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें व आखरी दिन गुरुवार को हरिद्वार से आए कथावाचक विनोद सुन्द्रियाल ने कहीं। श्रोताओं को कलयुग का वर्णन विस्तार से सुनाते हुए कहा कि तक्षक नाग ने ऋषि के श्राप के अनुसार सातवें दिनपरीक्षित को डंस लिया लेकिन परीक्षित उससे पहले योग व ध्यान के द्वारा अपना शरीर छोड़ जाते हैं। वे बैकुंठ के अधिकारी बन जाते हैं। कथा वाचक ने सभी शहयोगियों ब्राह्मणों का माला पहनाकर आभार व्यक्त किया। कथा का समापन भव्य आरती से किया गया। कथा समाप्ति के बाद हवन व यज्ञ हुआ। हवन के बारे में कथावाचक ने बताया कि हवन यज्ञ के माध्यम से ही देवताओं को उनका भाग मिलता है क्योंकि वैदित्यमान अग्नि देवताओं के मुख में निवास करती है। इससे भगवान सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। संगीत भागवत कथा में हरिद्वार उत्तराखंड से आए लवकुश भाई ने कई धुन सुनाकर सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलवा सुरेंद्र सादक ने भी मधुर भजन प्रस्तुत कर भक्तो का दिल जीत लिया। इस मौके पर आयोजक महेश जायसवाल, प्रीति जायसवाल, पुरुषोत्तम सिंह, अशोक सिद्धार्थ केसरवानी, कार्तिक, सुरेश जायसवाल, सुनील, किशन, चंदन राय, संदीप, अंगद, ऋतू, संगीता, राधा, कृष्णवती, इंद्रा मौजूद थे। आयोजक ने बताया कि कथा समापन पर चार जनवरी को दोपहर 12 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।