चंदौली। प्रदेश के आठ पिछड़े जिलों में शामिल चंदौली में अब निरक्षरों को चिह्नित करके साक्षर बनाया जाएगा। जिले की साक्षरता दर को दुरुस्त करने के लिए 15 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष और महिलाओं की पहचान करने का अभियान शुरू हो चुका है। इसकी जिम्मेदारी परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के कंधे पर है। करीब एक सप्ताह से चल रहे सर्वे के बाद वह 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट को बीएसए कार्यालय में जमा कराएंगे। जिसके बाद पूरा आंकड़ा शासन को भेजा जाएगा। फिर उनके लिए शासन स्तर से योजनाएं चलाई जा सकती हैं। शिक्षा स्तर के मामले में चंदौली की स्थिति काफी दयनीय है। यहां की साक्षरता दर मात्र 59.72 प्रतिशत है। इसमें पुरुष साक्षरता 61.84 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता 36.11 प्रतिशत है। यहां नौगढ़ और चकिया क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने स्कूल की चौखट तक नहीं देखी है। इनमें महिलाओं की तादात अधिक है। ऐसे लोगों को साक्षर बनाने के लिए सरकार की ओर से पहले भी अनौपचारिक शिक्षा व साक्षरता कार्यक्रम चलाए गए। लेकिन इसके बाद भी यह तस्वीर आज भी धुंधली ही है। चंदौली समेत प्रदेश के आठ जनपदों में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर एक बार फिर प्रयास शुरू किया गया है। इसके तहत ग्राम पंचायत के सभी मजरों में कुल निरक्षर पुरुष व महिलाओं का डाटा तैयार किया जाएगा। ग्राम पंचायत के संबंधित मजरे में तैनात परिषदीय शिक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह 30 नवंबर तक हरहाल में ऐसे लोगों को चिह्नित करके बीएसए कार्यालय में जमा कराएं। जहां से यह आंकड़ा शासन को भेजा जाएगा। संभावना है कि सरकार के पास आंकड़ा पहुंचने पर निरक्षरों का साक्षर बनाने के लिए योजना तैयार की जाएगी।
इनसेट
अन्य जनपद जो पिछड़े हैं
चंदौली, सोनभद्र, बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, फतेहपुर, श्रावस्ती व चित्रकूट आकांक्षात्मक जनपद में शामिल हैं। जहां बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निरक्षरों का सर्वे कराया जा रहा है।
कोट....
शासन के निर्देश पर जिले के सभी निरक्षरों का सर्वे कराया जा रहा है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है। 30 नवंबर तक सभी का डाटा एकत्र होने के बाद उसे शासन को भेज दिया जाएगा। भोलेंद्र प्रताप सिंह जिला बेसिक शिक्षाधिकारी चंदौली।