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खेती के लिए दे दी पशु चिकित्सालय की खाली जमीन

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कंदवा। बरहनी ब्लाक के अमड़ा गांव स्थित राजकीय पशु अस्पताल में भ्रष्टाचार व दुर्व्यवस्थाओं का बोलबाला है। पशुपालकों के बिना जानकारी के उनके पशुओं को सीमेन चढ़ाने से लेकर बंध्याकरण करने का खेल तो चल ही रहा है इसी में एक और मामला सामने आया है। अस्पताल में तैनात कर्मी पशु चिकित्सालय परिसर में खाली 20 बिस्वा जमीन को खेती के लिए पेशगी पर दे देते हैं और उससे मिलने वाले धन का बंदरबांट कर लेते हैं। इसकी जानकारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तक को नहीं है।
अस्पताल कर्मी खाली जमीन को प्रति वर्ष छह हजार रुपये किसानों कोे देते हैं। इस बार यह जमीन रुपये लेकर हरिपुर गांव के मिथुन कुमार को दे दी गई है। इस मद से मिले धन के बारे में पूछने पर अस्पताल पर तैनात कोई भी कर्मी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। पशु अस्पताल में भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण पशुओं के चारे के लिए आने वाला जई भी है। हर वर्ष यहां पशुओं के चारे के लिए हजारों रुपये का जई आती है। जिसे पशुपालकों और किसानों की बजाए रजिस्टर में ही बांट दिया जाता है। वर्ष 2018-19 के लिए अब तक दो कुंतल 10 किलो जई पशुपालकों में वितरण के लिए आ चुका है। इसे सिर्फ रजिस्टर में ही खानापूर्ति कर वितरण दिखा दिया गया लेकिन पशुपालकों का विवरण रजिस्टर में दर्ज नहीं है। यह भी कहीं दर्ज नहीं है कि जई किस गांव के किस किसान को दी गई है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के पिछले कुछ वर्षों के अभिलेखों की जांच कराई जाए तो लाखों रुपयों का घोटाला सामने आ सकता है। अस्पताल के पशु चिकित्सक और वहां तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से लंबे समय से बंदरबांट का खेल चल रहा है लेकिन किसी का ध्यान इस पर नहीं है।
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इस बारे में अस्पताल में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ. के. लाल व तैनात फार्मासिस्ट ही कुछ जानकारी दे सकते हैं। वैसे मामले की जांच करा दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डॉ. एसपी पांडेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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