चंदौली। किसानों के धान की फसल लगभग पूूूरी तरह से तैयार हो चुकी हैड्ड। किसानों के फसल को खरीदने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कुल 86 क्रय केंद्र स्थापित किये का बनाए गये हैं। जो भी किसान अपने धान को बेचने के लिए क्रय केंद्र पर जाएगा। उसे अपने धान की तौल व साफ करने के नाम पर लगने वाली मजदूरी(पल्लेदारी) किसान को देनी होगी। इसके लिए शासनादेश जारी कर दिया गया है। साथ ही क्रय केंद्र प्रभारियों को स्पष्ट रुप में इन बातों को सूचना बोर्ड पर चस्पा करने के लिए कहा गया है।
किसानों के धान व गेंहू की फसल को खरीदने के लिए क्रय केंद्रों की स्थापना की जाती है। किसान जब अपना अनाज वहां लेकर जाता था तो उन्हें पल्लेदारी अलग से देनी पड़ती थी। जो लोग नहीं देते थे उनके धान की तौल पल्लेदारों के हिसाब से होती थी। जबकि क्रय केंद्र पर लगने वाले मजदूरों की शासन द्वारा दी जाती थी। पल्लेदारी को लेकर तमाम विसंगतियां थीं। किसान व पल्लेदारों में विवाद भी होता था। इससे बचने के लिए शासन ने निर्देश जारी किया है कि जो भी किसान क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए ले जाएगें उन्हें मजदूरी स्वयं देनी पडे़गी। किसानों के द्वारा दिए गये मजदूरी का भुगतान सरकार धान के पैसे के साथ 15 रुपया प्रतिकुंतल के हिसाब से देगी। इस संबंध में जिला खाद्य विपणन अधिकारी के के सिंह ने बताया कि कुछ क्रय केंद्रो पर मजदूर किसानों से पल्लेदारी मांगते थे। जबकि कुछ स्थानों पर किसान अपने से ही मजदूरों पर खर्च करते थे। यह सब व्यवहारिकता वश होता था। इसकी शिकायत आने लगी थी। जिसे सरकार ने बंद कर दिया।