क्षेत्र के करीब तीन दर्जन गांवों के किसानों की धान की खड़ी फसल पानी के अभाव में सूखने के कगार पर है, लेकिन नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पाया है। जिससे किसानों की रेड़ा पर पहुंच चुकी धान की फसल एक पानी के अभाव में बर्बाद हो रही है। बर्बाद हो रही फसलों को देख कर किसान गुस्से में हैं । नरवन के किसानों के सामने एक बार फिर से 22 अक्तूबर 1995 का मंजर घूमने लगा है। इसमें कंदवा में पानी के लिए धरनारत किसानों पर पुलिस ने गोली चला दी थी और कई किसान गम्भीर रूप से घायल हो गए थे।
बारिश का क्रम अचानक ठहर जाने और नहरों में टेल तक पानी न पहुंचने के चलते कंदवा, कम्हरिया, बहेरा, सिसौरा, बकौड़ी, बसंतपुर, तेल्हरा, दरौली, असना, सुढना, कंजेहरा, पई, बहोरा चंदेल, बरिला, पिपरदहा, चखनिया, डिग्घी, कपसिया, नूरी, तम्बागढ़, सलेमपुर, कुसहा , डेढ़गांवा , अदसड , ककरैत , करौती , कोरमी ,धमिना , भदखरी , खुरहट , आदि गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों की रेड़ा पर पहुंच चुकी धान की फसल बर्बाद होने के मुहाने पर खड़ी है । ज्यादातर किसान नहरों के भरोसे ही अपनी फसलों की िसिंचाई करते हैं।जहां मौसम भी किसानों का साथ नहीं दे रहा है ,वहीं सिंचाई विभाग भी लापरवाह बना हुआ है । इसे लेकर किसानों में काफी नाराजगी है । ऐसे में क्षेत्र के किसानों के आंखों में एक बार फिर 22 अक्टूबर 1995 का मंजर साफ नजर आ रहा है। ऐसे समय में ही कंदवा- कम्हरिया में 22 अक्टूबर 1995 को किसान क्रांति हुई थी। वर्तमान समय में भी वही स्थिति बन रही है। भारतीय किसान यूनियन भानु गुट के मण्डल अध्यक्ष संत विलास सिंह , कम्हरिया गांव के सुरेंद्र सिंह का कहना है कि अगर टेल तक पानी नहीं पहुंचता है तो किसान कन्दवा क्रांति की पुनरावृत्ति करने को विवश होंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। अब आर पार की लड़ाई किए बिना सिंचाई विभाग की आंखें खुलने वाली नहीं हैं।