राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की दिली मंशा अब केंद्र के बाद देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में भी कमल खिलाना है। यूपी में भाजपा, हर हाल में भाजपा की रणनीति के तहत विधानसभा चुनाव में वेस्ट यूपी के जिताऊ नामों की खोज शुरू कर दी है।
ख्याल रखा जा रहा है कि दावेदारों की तलाश के लिए सामाजिक प्रबंधन, विचारधारा, व्यक्तिगत छवि और काडर को प्राथमिकता दी जाए। एक तरह से संघ की शाखा से भाजपा इस बार अपने विधायक निकालना चाहती है।
वेस्ट यूपी को भाजपा मजबूत गढ़ मानती है। मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनुपर, गौतमबुद्धनगर, शामली, बागपत पर पार्टी की खास नजर हैं। दरअसल, यहां से हाल ही में भाजपा के सांसद भी जीते हैं।
बुलंदशहर को भाजपा का ज्यादा मजबूत किला माना है, लेकिन कुछ वक्त से लगातार यहां पकड़ ढीली होती गई। नतीजा 2012 के चुनाव में बुलंदशहर लोकसभा की पांच में से एक भी विधानसभा सीट पर कमल नहीं खिला था। गौतमबुद्धनगर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली जिले की दो में से एक विधानसभा सीट सिंकदराबाद पर भाजपा गिनती के वोट से जीती थी।
तब बुलंदशहर लोकसभा पर सपा और गौतबुद्धनगर-खुर्जा लोकसभा पर सांसद भी बसपा के थे। वक्त ने करवट बदली और 2015 में मोदी लहर में बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर दोनों सीट से भाजपा जीती।
भाजपा उसी जीत की कड़ी का बरकरार रखना चाहती है। पार्टी की मंशा है कि बुलंदशहर लोकसभा क्षेत्र की पांचों और जिले की सातों विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की जाए।