औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकल रहा ‘जहरीला’ पानी से खेतों की सेहत बिगड़ रही है। आलम यह है कि एक दर्जन से अधिक गांवों में कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसान की इस समस्या को अफसरों भी सुनने को तैयार नहीं है।
जानकारी के अनुसार सिकंदराबाद के औद्योगिक क्षेत्र में करीब 400 फैक्ट्रियां रात दिन शोर मचा रही है। इनमें से अधिकांश फैक्ट्रियां नाले या खुले में अपना वेस्ट बहा रही हैं। ईटीपी यूनिटों में जरूर लगे हैं लेकिन वह सिर्फ जांच के दौरान अफसरों को चकमा देने के लिए है।
क्षेत्र से निकलने वाला नाला निजामपुर, प्राणगढ़ होते हुए सरायदुल्हा में करवर नदी में गिरता है। कई उद्यमी तो दूषित पानी को बोरिंग से भू-गर्भ में पहुंचा रहे हैं। इसके चलते क्षेत्र में जल प्रदूषण विकराल रूप ले चुका है।
दूषित पानी पीने से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे है। अपनी सेहत से चिंतित इलाके के लोग कई बार इन फैक्ट्रियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर चुके हैं लेकिन प्रशासन इनकी सुनने को तैयार नही है।
फैक्ट्रियों के वेस्ट और पानी की समय-समय पर प्रदूषण विभाग जांच कराता है। फैक्ट्री प्रबंधन को नोटिस भी भेजे जाते हैं। - कन्हई सिंह, एसडीएम। फैक्ट्रियों में जांच की गई है। मामले से आला अफसरों को अवगत करा दिया गया है। यदि प्रदूषित पानी खुले में डाला जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। - हीरालाल सैनी, तहसीलदार
फैक्ट्रियों का रसायनिक पानी आसपास के खेतों में छोड़ दिया जाता है, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है। उत्पादन घटने से किसान के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। - राजेंद्र सिंह, किसान
केमिकल युक्त पानी से सिंचाई करने पर जमीन तो बंजर हो ही रही है। साथ ही फसलें भी खराब हो जाती है। फसलों की लागत बढ़ गई है। खेती की रकबे के हिसाब से पैदावार नहीं हो रही है। - विजय यादव, किसान
प्रशासन से शिकायत करने पर कोई कदम नहंी उठाया गया है। अधिकारी आंखें बंद किए हैं। फैक्ट्रियों का गंदा और केमिकलयुक्त खेतों में भर रहा है। - शिव सिंह, किसान
खेतों में भरा यह पानी जमीन खराब कर रहा है। इस पानी को जानवर पी रहे है। इससे पशु अनजान बीमारी के शिकार हो रहे हैं। प्रशासन जानकार भी अनजान बना है। - राजेश विधोड़ी, किसान