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Bulandshahar News: बहू देखने निकले थे, अर्थी बनकर लौटेंगे - मां और ताऊ की मौत से गांव में पसरा मातम

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मृतक शेर सिंह। फाइल फोटो
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ककोड़। जिस घर में शहनाई बजने वाली थी, वहां अब चीख-पुकार है। बेटे के लिए बहू का सपना देखने निकली मां सावित्री देवी और पिता की तरह पालने वाले ताऊ शेर सिंह अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। लखनऊ में सड़क हादसे में दोनों की मौत की खबर रविवार को जैसे ही गांव दस्तूरा पहुंची तो पूरे गांव में मातक छा गया। घर में अब शवों के पहुंचने का इंतजार है ताकि आखिरी बार चेहरा देखकर विदा किया जा सके।
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गलियां सूनी हो गईं
रविवार सुबह हादसे की सूचना गांव पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। चीख-पुकार सुनकर मोहल्ले के लोग दौड़े आए। देखते ही देखते भीड़ पीड़ित परिवार के घर पर जमा हो गई। धीरे-धीरे खबर पूरे गांव में फैली तो गांव की गलियां सूनी हो गईं। सभी की आंख नम थीं और हर जुबान पर एक ही बात बहुत बुरा हुआ। परिवार के लोग दहाड़े मारकर रो रहे थे। गांव का हर व्यक्ति पीड़ित परिवार के दुख में शामिल होकर उन्हें ढाढ़स बंधा रहा था। रिश्तेदारों का तांता लगा था, पर किसी के पास कहने को शब्द नहीं थे।

2019 में सिपाही, 2021 में बने दरोगा - बेटे की खुशी देखने निकली थी मां
प्रेमराज ने बताया कि उनके छोटे भाई सोनू निगम वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। 2021 में उन्होंने दरोगा की परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्तमान में उनकी तैनाती बिजनौर जनपद के नाहटौर थाने में है। कुछ दिन पहले सोनू छुट्टी पर घर आए थे। रविवार सुबह वह अपनी शादी के लिए लड़की देखने मोहनलालगंज जा रहे थे। कार सोनू स्वयं चला रहे थे। कार में उनकी मां सावित्री देवी 65 वर्ष, ताऊ शेर सिंह 70 वर्ष और दोस्त संदीप भाटी भी थे। मां बेटे की शादी का सपना आंखों में सजाए बैठी थी, पता नहीं था कि ये सफर आखिरी सफर बन जाएगा।
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पिता की मौत के बाद ताऊ ने निभाई पिता की जिम्मेदारी, अब दोनों चले गए
प्रेमराज ने बताया कि उनके पिता लक्ष्मण सिंह की वर्ष 2003 में हृदय गति रुकने से मौत हो गई थी। तब सोनू बहुत छोटे थे। पिता के निधन के बाद ताऊ शेर सिंह ही परिवार के अभिभावक बन गए थे। पिता गांव में रहकर खेती करते थे। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी शेर सिंह के कंधों पर आ गई। उन्होंने सोनू का पिता की तरह पालन-पोषण किया, उसके सपनों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। सोनू के दरोगा बनने पर परिवार में खुशी का माहौल था। दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। सोचा था अब बेटे की शादी कर बहू लाएंगे, घर फिर खुशियों से भर जाएगा। पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस ताऊ ने पिता बनकर बेटे को दरोगा बनाया, उसी बेटे की शादी का रिश्ता देखने जाते हुए उसकी सांसें थम गईं।

अंतिम दर्शन को तरस रहा गांव
सावित्री देवी और शेर सिंह की मौत के बाद से परिवार और ग्रामीण गम में डूबे हैं। सभी को अब दोनों के शव गांव पहुंचने का इंतजार है, ताकि अंतिम दर्शन कर उन्हें सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा सके। घर में अब शहनाई की जगह सिसकियां हैं। जिस मां ने बेटे की बारात का सपना देखा था, उसी बेटे को अब मां की अर्थी को कंधा देना होगा।

मृतक शेर सिंह। फाइल फोटो

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