स्कूल प्रबंधन और प्राइवेट पब्लिशर्स के खिलाफ उठी पेरेंट्स की आवाज कहीं टैक्स वसूली में न दब जाए। स्कूल प्रबंधन-प्राइवेट पब्लिशर्स के कॉकस तोड़ने से ज्यादा वाणिज्य कर अफसरों का ध्यान टैक्स वसूली पर टिका है। जिलेभर में विभाग को करीब पांच करोड़ से ज्यादा टैक्स वसूली होने की उम्मीद है।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और प्राइवेट पब्लिशर्स के कॉकस से उनकी जेब पर डाका डाला जा रहा है। इस कॉकस को तोड़ने के लिए जिलाधिकारी ने वाणिज्य कर अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए। वाणिज्य कर अफसरों ने जब कॉकस को तोड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की तो करोड़ों की टैक्स चोरी का भी राजफाश हुआ।
स्कूल प्रबंधन द्वारा निर्धारित दुकानों पर बेचे जा रहे कॉपी-किताब से लेकर स्कूल यूनीफार्म, बैग और जूतों पर मनमाने दाम वसूले जा रहे थे, जबकि इसकी एवज में विभाग को टैक्स नहीं दिया जा रहा था।
वाणिज्य कर अफसरों के मुताबिक टैक्स चोरी में लिप्त जिन पब्लिशर्स, बुक सेलरों, रेडीमेड गारमेंट्स, जूते के दुकानदारों को चिह्नित किया है, उनसे करीब पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स वसूली की उम्मीद है।
वाणिज्य कर विभाग किताब को छोड़कर बाकी सभी सामानों पर पांच फीसदी की टैक्स वसूली करेगा, जबकि अभिभावकों पर सबसे ज्यादा मार किताबों से पड़ रही है। एनसीईआरटी की 50 रुपये की किताब 500 रुपये में बेची जा रही है।
जिला अभिभावक समिति की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया कि जनपद में छोटे-बड़े प्राइवेट करीब 62 स्कूल हैं। इन स्कूलों में यदि औसतन 2000 बच्चों के पढ़ाई का आंकड़ा लिया जाए तो जिलेभर के स्कूलों में 124000 बच्चों का आंकड़ा सामने आता है।
इन बच्चों के अभिभावकों को कोर्स की किताब-कॉपी से लेकर स्कूल बैग, यूनीफॉर्म, शूज आदि बेचने में ठगा गया। प्रशासन को इसे आर्थिक अपराध मानते हुए स्कूल प्रबंधनों पर एफआईआर करानी चाहिए।