हापुड़। जिले में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म होगा। इससे पहले सभी 273 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य पूरे कराने और भुगतान पर जोर दिया जा रहा है। ठेकेदारों की भुगतान को लेकर सांसें अटकी हुई हैं। इसकी वजह यह है कि ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों का भुगतान ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के माध्यम से होता है।
ग्राम पंचायतों को 15 वें केंद्रीय वित्त आयोग से 17.98 करोड़, 5वां राज्य वित्त आयोग से 35.47 करोड़, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-2 में 86 लाख और अन्य कार्यों के लिए अलग-अलग मद में धनराशि मिली थी। ऐसे में अब ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। इससे विकास कार्यों पर ब्रेक लगने की आशंका है। वहीं, प्रधानों को डर है कि बस्ता जमा होने से पहले भुगतान न हुआ तो जवाबदेही का सारा बोझ उन्हीं पर आ गिरेगा।
ऐसे में प्रधानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधूरा काम और भारी बकाया का भुगतान करना है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और वित्तीय वर्ष 2025-26 का करीब 25 प्रतिशत अभी भी बकाया है। ऐसे में प्रधान चाहते हैं कि कार्यकाल को समाप्त करने वाले उनके हस्ताक्षर से भुगतान हो जाए ताकि, भविष्य में किसी ऑडिट या जांच की आंच उन पर न आए। बता दें कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए प्रधान और पंचायत सचिव का संयुक्त खाता संचालित होता है।
कार्यकाल समाप्त होने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव आना तय है, इसलिए अधिकारी चाहते हैं कि सभी भुगतान और कार्य समय रहते पूरे कर लिए जाएं। इसके अलावा पंचायत सहायकों और शौचालयों में तैनात केयर टेकरों के बकाया भुगतान को भी प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। जिले की 273 ग्राम पंचायतों में 252 केयरटेकर तैनात हैं, इसमें धौलाना में 46, गढ़ में 57, हापुड़ में 84 और सिंभावली में 65 केयरटेकरों को 653.47 लाख रुपये का भुगतान हो चुका है। शेष बचे भुगतान के आदेश भी दिए गए हैं।
प्रशासकों के हाथ में आ सकती है कमान
प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होते ही वित्तीय अधिकार प्रशासकों के पास जाने की उम्मीद है। प्रधानों के अनुसार उनके कार्यों की फाइलें दबने से भुगतान अटका तो वे वेंडर्स और मजदूरों के निशाने पर आ जाएंगे। इसलिए ग्राम विकास अधिकारियों को जल्द से जल्द मस्टर रोल क्लोज कर फंड ट्रांसफर ऑर्डर जनरेट करने के निर्देश हैं। वहीं, शासन से अतिरिक्त बजट की मांग की गई है ताकि, कार्यकाल खत्म होने से पहले मजदूरों को पैसा मिल सके। वेंडर्स का बकाया भुगतान कर विवादों को सुलझाया जा सके। हालांकि, प्रधानों को उम्मीद है कि अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले वर्ष 2027 में होंगे। इसलिए उनका कार्यकाल बढ़ सकता है। हालांकि, अभी तक प्रदेश सरकार ने इस संबंध में स्थिति साफ नहीं की है, लेकिन कार्यकाल समाप्ति से पहले विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है।
कोट
ग्राम पंचायतों में जारी कार्य और भुगतान पर नजर है। एडीओ पंचायत को निर्देश दिए हैं कि 25 मई तक पंचायत स्तर पर उपलब्ध बजट के अनुसार विकास कार्य पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि कार्यकाल समाप्ति के बाद कोई वित्तीय विवाद न हो।
- शिव बिहारी शुक्ला, डीपीआरओ