दो साल से हक की खातिर दर दर भटक रही शहीद की पत्नी का इस बार भी सम्मान नहीं हुआ। जिले के प्रशासनिक अफसरों ने शहीद की पत्नी का नाम सम्मान सूची मेें शामिल कराने का दावा किया था। मगर वह हवाई निकला और शहीद की पत्नी का सम्मान नहीं हो सका।
सिकंदराबाद के गांव कैथला निवासी आरक्षी एकांत यादव दो दिसंबर 2014 को मेरठ में पुलिस मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। 21 अक्तूबर 2015 को लखनऊ में शहीद एकांत यादव की पत्नी अंशू यादव का सम्मान होना था। बता दें कि विभाग की ओर से अंशू को फोन किया गया। मगर सम्मान दिवस से एक दिन पूर्व अचानक अंशू को लखनऊ नहीं आने की सूचना दी गई।
दरअसल, शहीद के परिवार के ड्यूज का भुगतान सरकारी अफसरों की ढील से रुका हुआ था। अंशू मुख्यमंत्री से शिकायत न कर दे, इसलिए उसको लखनऊ नहीं बुलाया गया। समस्या को लेकर अंशू 19 अक्तूबर को डीएम से मिली थी। डीएम ने अंशू का नाम सम्मानित महिलाआें की सूची में शामिल कराने का दावा भी किया था। मगर ऐसा नहीं हो सका।
शहादत के बाद शहीद की विधवा का सम्मान न होना दर्शाता है कि सिस्टम की नजर में शहीद का दर्जा क्या है? तमाम आश्वासन के बाद इस बार भी सम्मान नहीं किया गया। - अंशू यादव, शहीद की विधवा
सम्मानित महिलाओं की सूची में नाम जुड़वाने का प्रयास किया गया मगर किन्हीं कारणों से अंशू का नाम सूची में शामिल नहीं हो सका। - अरविंद कुमार मिश्र, एडीएम (प्रशासन)