बुलंदशहर। लगन खत्म होने से अब शहनाई की गूंज थम गई है। इसके बाद अगले वर्ष एक फरवरी को शुक्र उदय होंगे और पांच फरवरी से विवाह के मुहूर्त की शुरुआत होगी। वहीं, 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा और 52 दिनों तक शुक्र अस्त रहेंगे। जनवरी माह में कोई मुहूर्त नहीं है।
पं. कैलाश चंद शर्मा ने बताया कि बताया कि शुभ विवाह मुहूर्त की गणना पंचांग, तिथिवार, नक्षत्र और शुक्र बृहस्पति के अस्त उदय पर आधारित होती है। आगामी वर्ष 2026 में चातुर्मास, खरमास और शुक्र एवं बृहस्पति के अस्त होने की अवधि को छोड़कर बाकी सभी महीनों में विवाह के लिए शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। गुरु ग्रह पांच दिसंबर को वक्री गति से कर्क राशि से मिथुन राशि में प्रवेश कर गया है। इसके बाद वे दो जून 2026 को अपनी उच्च राशि कर्क में चले जाएंगे और 31 अक्तूबर 2026 तक रहेंगे।
इस दौरान उच्च राशि के गुरु बहुत शुभ परिणाम देंगे। बताया कि देवउठनी एकादशी के बाद शुरू हुए विवाह मुहूर्त सात दिसंबर से रुक गई है। 16 दिसंबर से एक माह सूर्य की धनु संक्रांति के कारण खरमास शुरू हो जाएगा।
उसमें भी विवाह और मांगलिक कार्यक्रम नहीं होते हैं। विवाह मुहूर्त में गुरु शुक्र अस्त का भी विचार किया जाता है। 12 दिसंबर 2025 को शुक्र 52 दिन के लिए अस्त हो जाएंगे और एक फरवरी 2026 को शुक्र उदय होंगे। शुक्र अस्त रहने के कारण वर्ष 2026 के जनवरी में विवाह का मुहूर्त नहीं है। पांच फरवरी 2026 से विवाह आदि कार्य शुरू होंगे।