जिले में स्वच्छता अभियान की बागडोर भले प्रशासन मुस्तैदी से संभाल रखा है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नहीं दिख रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि शहर में कई नगर पालिकाओं के पास स्थायी डंपिंग ग्राउंड नहीं है। पालिका कर्मियों की लापरवाही का आलम यह है कि घरेलू कूडे़ के ढेर को खुले में आग के हवाले करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
इससे निकलने वाला जहरीला धुआं शहर की सेहत बिगाड़ रहा है। जबकि इस मामले में एनजीटी कई बार सख्त आदेश दे चुका है। हालांकि कई नगर निकायों में डंपिंग ग्राउंड के लिए आधी अधूरी जमीन चिन्हित कर कर ली गई है।
शहर में कचरा लिफ्टिंग और डंपिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। ऊपरकोट, आवास विकास कालोनी प्रथम, आवास विकास कालोनी द्वितीय, शांतिनगर भूड़, शनिदेव मंदिर रोड, शिकारपुर रोड, इस्लामाबाद, नरसलघाट, स्याना बस अड्डा रोड इलाकों में गंदगी का अंबार है। कचरा उठाने के बजाय सफाई कर्मचारी जलाने में ज्यादा समय बिता रहा हैं।
आवास विकास कालोनी में डोर टू डोर कचरे का कलेक्शन महज औपचारिकता है। शनिदेव मंदिर रोड पर किसी भी समय खुले में कचरा जलते देखा जा सकता है। गुलावठी नगर पालिका ने वर्ष-2016 में जमीन तलाश भी ली थी। पालिका ने बाकायदा स्टांप भी खरीद लिया, लेकिन योजना फिर ठंडे बस्ते में चली गई।
बुलंदशहर में जमीन चिन्हित कर ली गई है, लेकिन स्थायी डंपिंग ग्राउंड वजूद में नहीं है। बुलंदशहर नगर पालिका में जरूरत के हिसाब से आधे कर्मचारी है। प्रदूषण फैलाने वाले 12 हजार वाहन आउटः जिले में वायू प्रदूषण का सबब बने 10 साल पुराने डीजल वाहनों को एनसीआर से बाहर आउट कर दिया गया है। बता दें कि ऐसे डीजल वाहनों की संख्या 21 हजार थी।
एनजीटी ने एनसीआर से बाहर भेजने का आदेश ट्रांसपोर्ट विभाग को दिया था। इसी क्रम में एआरटीओ प्रशासन ने प्रतिबंधित डीजल वाहन स्वामियों को एनओसी प्रदान की है ताकि दूसरे जनपदों में इन वाहनों को पंजतीकृत कराया जा सके।