शिकारपुर। पुरातत्व विभाग में दर्ज करीब 700 वर्ष पुराना बारहखंभा अपना वजूद खोता जा रहा है। आज तक किसी भी स्तर से इसका रखरखाव के लिए कोई पहल नहीं की गई। यदि इस ओर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो शिकारपुर की खास पहचान बारहखंभा आने वाले समय में अपना अस्तित्व खो सकता है। यदि इसे सहेजा जाए तो जिले का प्रमुख पर्यटन केंद्र भी बन सकता है।
सदियों पुराने इस खुली इमारत में कुल 16 खंभे और 12 खन यानी दरवाजे हैं। इसकी खासियत है कि हर तरफ से देखने पर 12 दरवाजे ही नजर आते हैं। सैकड़ों साल पहले निर्माण होने से लेकर आज तक कई बार भयंकर आंधी तूफान आए, लेकिन बिना छत खड़े इन खंभों को नहीं हिला सके। ऐसा नहीं है कि इमारत को पूरा करने का प्रयास नहीं किया गया, लेकिन तमाम कारणों और हादसों के चलते कभी इमारत की छत पूरी नहीं हो पाई। मेरठ-बदायूं स्टेट हाईवे से मात्र चंद कदमों की दूरी पर स्थित बारहखंभा है।
इसके निर्माण को लेकर तमाम किस्से-कहानियां प्रचलित हैं। शिकारपुर कस्बे के उत्तरी छोर पर लाल पत्थर से बनी यह इमारत आज भी एक रहस्य बनी हुई है। तमाम सवाल ऐसे हैं जिनका अब तक कोई जवाब नहीं मिल सका है। जैसे-इसे किसने बनवाया? कुछ लोगों जहां इसे दूसरी दुनिया से आए जिन्न द्वारा निर्माण कराए जाने का दावा करते हैं, तो कुछ लोग इसे सिकंदर लोधी के धर्मगुरु सैयद अब्दुल्ला कुतुब बुखारी की इबादत स्थली बताते हैं।
स्थानीय लोग मानते हैं कि इमारत का निर्माण एक ही रात में अदृश्य शक्तियों द्वारा किया गया था लेकिन सुबह हो जने के कारण निर्माण कार्य अधूरा ही रह गया। मोहर्रम के अवसर पर बारहखंबा को देखने के लिए दिल्ली एवं दूर-दराज से सैयद बिरादरी के लोग काफी संख्या में आते हैं।
क्षेत्र निवासी राजवीर सिंह, प्रहलाद सिंह और रामेश्वर शर्मा आदि बताते हैं कि उनके बजुर्ग इस की कहानी किस्से बताते आए हैं। बारहखंभा के बारे में एक ओर रहस्यमयी कहानी भी प्रचलित है। कहा जाता है कि करीब 700 से भी अधिक साल पहले एक रात जिन्नातों ने यहां आकर निर्माण शुरू किया था। इस निर्माण को जिन्नात जब तक पूरा करते कहीं दूर एक चक्की चलने की उन्हें आवाज आई।
उन्हें लोगों के जागने का आभास हुआ तो जिन्नात उस निर्माण को बीच में छोड़कर वहां से चले गए। तब से ये निर्माण आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। लोग ये भी बताते हैं कि जिस महिला ने चक्की चलाई थी जिन्नातों ने उसी महिला को जिंदा यहां लाकर दफन कर दिया था। बारहखंभा को लेकर कई और कहानी प्रचलित हैं, लेकिन लोगों की मांग है कि इस समय इसकी हालत को देखकर इसे सहेजना जरूरी है।
बारहखंभा पुरातत्व विभाग के अधीन है। इसकी चर्चा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि दूर-दूर तक होती है। इसे सहेजने की जरूरत है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। इसके लिए नगर पालिका की ओर से पुरातत्व विभाग से पत्राचार किया जाएगा। - राजबाला सैनी, अध्यक्ष नगर पालिका शिकारपुर