बुलंदशहर। जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। परियोजना के लिए अवार्ड घोषित होने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया पर नजर है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से 16 अक्तूबर को लखनऊ में टेंडर खोला जाएगा। इसके बाद निर्माण के लिए चयनित संस्था को काम सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सब कुछ तय समय के अनुसार चला तो दिसंबर के अंत तक एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू होने की संभावना है।
गंगा एक्सप्रेसवे को जेवर स्थित नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेस वे से जोड़ने के लिए जिले में ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाना है। इसके लिए जिले में एक्सप्रेसवे के लिए करीब 82 प्रतिशत जमीन का किसानों की सहमति से बैनामा कराया जा चुका है।
शेष जमीन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है। जिन किसानों की जमीन का अभी बैनामा नहीं हुआ है, उन्हें प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुआवजे के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। अवार्ड घोषित होने के साथ ही परियोजना के निर्माण की तैयारियों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
पांच तहसीलों के गांवों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
करीब 74 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर जिले की स्याना, शिकारपुर, बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद तहसीलों के गांवों से होकर गुजरेगा। इसका मुख्य उद्देश्य जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ना है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए बेहतर संपर्क मार्ग मिलने की उम्मीद है।
साथ ही क्षेत्रीय आवागमन और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। परियोजना के लिए जिले के विभिन्न गांवों में किसानों की जमीन ली जा रही है। भूमि खरीद की प्रक्रिया में आपसी सहमति से बैनामे को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से किसानों के साथ प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अब तक करीब 82 प्रतिशत जमीन का बैनामा होने के बाद शेष भूमि की व्यवस्था करना प्रमुख चुनौती है।
बैनामे के बाद मुआवजे का इंतजार
एक्सप्रेसवे के लिए जमीन देने वाले किसानों को मुआवजा दिया जाना है। जिन किसानों की जमीन का बैनामा हो चुका है, उनकी प्रक्रिया के अनुसार भुगतान की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। वहीं, जिन किसानों की जमीन का बैनामा अभी बाकी है, उन्हें पहले संबंधित औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
इसके बाद ही मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आने से परियोजना के निर्माण की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, शेष जमीन के बैनामे और मुआवजे की कार्रवाई पूरी करना भी जरूरी होगा ताकि निर्माण कार्य के दौरान भूमि संबंधी अड़चने सामने न आएं। परियोजना के लिए पहले भूमि खरीद और अधिग्रहण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की गई थीं। अब अवार्ड घोषित होने के बाद निर्माण से जुड़ी अगली प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
टेंडर खुलने के बाद तय होगी निर्माण की रूपरेखा
यूपीडा की ओर से 16 अक्तूबर को लखनऊ में टेंडर खोला जाएगा। इसके बाद निविदा प्रक्रिया के तहत निर्माण एजेंसी के चयन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। चयनित संस्था को काम मिलने के बाद निर्माण शुरू करने की तैयारी की जाएगी। दिसंबर के अंत तक काम शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इसके लिए टेंडर और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं का समय पर पूरा होना अहम रहेगा।
कोट -
ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 16 अक्तूबर को लखनऊ में टेंडर खोला जाएगा। डीएम की ओर से अवार्ड घोषित किया जा चुका है। शेष करीब 18 फीसदी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। जल्द ही इसका शिलान्यास कराते हुए आगे का कार्य कराया जाएगा। नितीश कुमार, एडीएम प्रशासन