जहांगीराबाद में हुई मजलिस कलाम पेश करते अकीदतमंद। संवाद
जहांगीराबाद। मोहर्रम की शुरुआत के साथ ही नगर में गम और अकीदत का माहौल है। मोहर्रम पर मोहल्ला आहनग्रान में हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की याद में मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। कुर्बानी का बखान सुनकर लोगों की आंखों से आंसू छलक उठे।
मजलिस में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान मुफ्ती शफी उर्रहमान बुखारी का शहर काजी डॉ. सैयद कलीमउर्रहमान बुखारी ने दस्तारबंदी कर स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर काजी डॉ. सैयद कलीमउर्रहमान बुखारी ने व संचालन हाफिज उस्मान अंसारी ने किया। अपने संबोधन में मुफ्ती शफी उर्रहमान बुखारी ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत और कर्बला के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपने परिवार और साथियों सहित कर्बला के मैदान में शहादत दी। उनकी कुर्बानी आज भी दुनिया को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती है। शहीदाने कर्बला की याद में कलाम भी पेश किए गए। इस अवसर पर सभासद सुल्तान अंसारी, हाफिज इसरार पठान, अंजुमन हुसैनी के अध्यक्ष साबिर सली, सचिव अब्बास अंसारी, मास्टर मुस्तुफा सैफी, अशरफ खान सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।