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अंधविश्वास की बलि चढ़ी पूजा: महिला पर तांत्रिक ने बताया भूत का साया, गंगा में लगवा रहा था डुबकी, डूबने से मौत

Thu, 25 Jun 2026 10:06 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, अनूपशहर (बुलंदशहर)

सार

अंधविश्वास के कारण तांत्रिक ने पूजा को भूतप्रेत उतारने गंगा में डुबकी लगवाई। वह तेज बहाव में बह गई, जिससे उसकी मौत हो गई। पति ने तांत्रिक पर हत्या का आरोप लगाया है।
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पूजा की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गंगा में डूबने से हुई पूजा 24 वर्ष की मौत महज एक हादसा नहीं है। बल्कि उसकी मौत अंधविश्वास के कारण हुई। पूजा से भूतप्रेत का साया उतारने के लिए गंगा के गहरे पानी में डूबकी लगवाई जा रही थी। इसी दौरान वह गंगा के तेज बहाव में बह गई। बृहस्पतिवार की सुबह घटना स्थल से करीब 4.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मस्तराम घाट से एनडीआरएफ की टीम ने पूजा के शव को बरामद कर लिया है। पति ने तांत्रिक (भगत) पर पत्नी की हत्या किए जाने का आरोप लगाया है।

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थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के गांव भिरौली निवासी ललित ने बताया कि उनकी पत्नी पेट रोग से पीड़ित थी। बुलंदशहर के एक चिकित्सक से वह पत्नी का उपचार करा रहे थे। चिकित्सक ने उन्हें आंतों में इंफेक्शन और लीवर सूजन पर बताई थी। उपचार के बाद भी स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर वह गांव बालका के एक तांत्रिक से मिले। तांत्रिक ने उन्हें बताया कि उनकी पत्नी किसी रोग से पीड़ित नहीं है, बल्कि उसपर भूतप्रेत का साया है। 

तांत्रिक ने विश्वास दिलाया कि वह भूतप्रेत के साए को उनकी पत्नी से उतार देंगे और वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएगी। इसके बाद तांत्रिक ने उनसे अनुष्ठान के नाम पर 1500 रुपये और अपनी फीस के 3600 रुपये, मिठाई का डब्बा लिया। मंगलवार की शाम तांत्रिक अपने दो चेलों के साथ उनके घर पहुंचा और भूतप्रेत उतारने के लिए कहकर उनकी पत्नी को अनूपशह-बुलंदशहर मार्ग पर संभल पुल के पास गंगा पर ले गया। वह और उनका साला भी साथ गए। गंगा के गहरे पानी में उनकी पत्नी को एक पत्थर पर खड़ा कर दिया गया। 

तांत्रिक ने पत्नी के सिर पर सामग्राी रखकर गंगा किनारे अनुष्ठान शुरू किया। तांत्रिक का एक चेला पत्नी के पास खड़ा था। अनुष्ठान पूरा होने के बाद चेले ने पत्नी के सिर से अनुष्ठान सामग्री को उतारकर गंगा में डूबकी लगवाई। इसी दौरान बह गंगा के तेज बहाव में बह गई। जब उन्होंने शोर मचाते हुए पत्नी को बचाने के लिए कहा तो तांत्रिक ने धमकाते हुए उन्हें चुप करा दिया। कुछ देर बाद तांत्रिक का चेला बाहर निकल आया। मगर उनकी पत्नी तेज बहाव में बह गई। 

महिला के डूबने के बाद भागा तांत्रिक
पत्नी के गंगा में डूब जाने के बाद तांत्रिक अपने चेलों के साथ मौके से फरार हो गया। घटना के बाद से ही गोताखोर, पीएसी फ्लट प्लाटून पूजा की गंगा में तलाश कर रहे थे। नहीं मिलने पर बृहस्पतिवार की सुबह एनडीआरएफ टीम को बुलाया गया। एनडीआरएफ की टीम ने सर्च अभियान शुरू करने के आधा घंटे बाद ही घटना स्थल से करीब 4.5 किलोमीटर की दूरी पर मस्तराम घाट से पूजा के शव को बरामद कर लिया। उसका शव झाड़ियों में अटका हुआ था। 

तांत्रिक पर लगाया हत्या का आरोप
पति ललित ने तांत्रिक पर पत्नी की हत्या किए जाने का आरोप लगाया। कहा कि वह तांत्रिक के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग करेंगे। ताकि कोई ओर पूजा अंधविश्वास की बलि ना चढ़े। मृतका के बड़ी बेटी बुलबुल सात वर्ष, छोटी बेटी हिमांशी चार वर्ष, बेटा नितेश छह वर्ष तीन बच्चे हैं। पूजा की गंगा में अचानक डूबने से हुई मौत से उसके ससुराल और मायके में शोक छाया हुआ है। परिवार के लोगों को रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं गांव में शोक है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि पूजा के शव को बरामद कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस जांच कर रही है।

अंधविश्वास लोगों की ले रहा जान
अंधविश्वास में जनपद में पूजा की मौत का मामला कोई नया नहीं है। हाल ही अहमदगढ़ क्षेत्र में अंधविश्वास के कारण एक मासूम की जान चली गई थी। घर में खेलते समय अहमदगढ़ क्षेत्र के गांव निवासी एक बच्चे को सांप ने काट लिया था। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बजाए झाड-फूंक के लिए एक तांत्रिक के पास ले गए। तांत्रिक जहर उतारने के लिए बच्चे पर झाड-फूंक करता रहा। हालत में सुधार होने के बजाए उसकी हालत बिगड़ती चली गई। इसपर भी तांत्रिक नहीं रुका और परिजनों को बच्चे के ठीक होने का विश्वास दिलाता रहा। 
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आखिरकार अंधविश्वास के कारण बच्चे की मौत हो गई। गांव जयरामपुर कुदेना निवासी मोहित कुमार (20वर्ष) को खेत पर सांप ने काट लिया था। परिजन उसे इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले गए थे। हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उसे झाड़-फूंक के लिए ले गए, लेकिन उसकी हालत और अधिक बिगड़ती चली गई। कुछ लोगों ने परिजनों को बताया कि सांप काटे व्यक्ति के शरीर को गंगा में रखने पर जहर उतर जाता है। अंधविश्वास में आकर परिजनों ने मोहित के शव को बांधकर गंगा नदी में रख दिया और उसे पुल के खंभे से बांध दिया। सांस वापस न आने पर बाद में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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