स्कूल प्रबंधक और प्राइवेट पब्लिशर्स अभिभावकों को किस कदर लूट रहे हैं, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। अभिभावकों से कॉपी-किताबों का 10-10 गुना अतिरिक्त पैसा वसूला जा रहा है। कई स्कूल संचालक तो अपना ही पब्लिकेशन खोलकर बैठे हैं। अभिभावकों को इनसे ही किताब खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
स्कूल प्रबंधकों और प्राइवेट पब्लिशर्स के बीच चल रहे कमीशन के खेल की परतें धीरे-धीरे उधड़ती जा रही हैं। एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की कक्षा छह की विज्ञान की जो किताब महज 50 रुपये की है, वही किताब प्राइवेट पब्लिशर्स की 426 रुपये की है।
अभिभावकों से कॉपी-किताब के वास्तविक मूल्य का 10-10 गुना रुपया वसूला जा रहा है। अभिभावकों के साथ हो रही इस लूट में स्कूल प्रबंधकों, प्राइवेट पब्लिशर्स और पुस्तक विक्रेताओं की बराबर भागीदारी है। वाणिज्य कर विभाग की जांच में कमीशन के इस खेल की परतें उखड़ने लगी हैं।
जांच में सामने आया है कि नगर का एक बड़ा स्कूल संचालक तो खुद ही पब्लिशर्स बना हुआ है। अपने ही पब्लिकेशन से छप रही किताबों को स्कूल में लगाया जा रहा है। अभिभावकों को इसी पब्लिकेशन की किताब-कॉपी खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है।
वाणिज्य कर विभाग के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि बड़े स्तर पर चल रहे कमीशन के खेल को लेकर डीएम ने सख्त रुख अपनाया है। अभिभावकों से लूट मचा रहे स्कूल प्रबंधक और प्राइवेट पब्लिशर्स के खिलाफ चल रही जांच के बाद इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।