नगर के लोगों के लिए सिरदर्द बन चुके बंदरों को पकड़ने के लिए नगर पालिका ने एक महीने में डेढ़ लाख रुपये खर्च कर दिए लेकिन बंदर अभी भी शहरवासियों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। पिछले तीन महीने में ही नगर क्षेत्र में बंदरों के उत्पात के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि दर्जनभर से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो चुके हैं।
बंदरों के डर से लोगों ने छत पर जाना और कपड़े फैलाना कम कर दिया है। साथ ही बालकनी और आंगन में लोहे के जाल लगवा दिए। बावजूद इसके बंदरों का डर कम नहीं हुआ। बच्चे खुले में खेलने से डरने लगे। बंदरों को पकड़कर जंगल में छुड़वाने की मांग उठी तो नगर पालिका ने कवायद शुरू की।
इसके तहत नगर पालिका ने मई माह में बंदर पकड़ने पर एक लाख 54 हजार 675 रुपये खर्च किए लेकिन शहरवासियों को अभी तक राहत नहीं मिली है।
बंदरों के कारण घर में कैद होकर रहना पड़ता है। अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं है।-रीनावाला, गृहणी
कई दिन से समस्या है। पालिका ने कुछ नहीं किया ।- पंकज चौधरी, व्यवसायी
पालिका अफसर कहते हैं कि बंदर पकड़े जा रहे हैं, कार्रवाई दिख नहीं रही ।- सुरेन्द्र चौहान, एडवोकेट
हमनें कभी भी बंदर पकड़ो अभियान चलता नहीं देखा। ै।-दीपा शर्मा, गृहणी
नगर पालिका समय-समय पर बंदर पकड़ने के लिए अभियान चलाती है। इस दौरान बंदर भी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन इनकी संख्या अधिक होने के कारण इन पर पूरी तरह नियंत्रण में समय लगेगा।-एके सिंह, ईओ, नगर पालिका