40 साल से दिव्यांगों की सेवा में जुटी हैं बीना दीदी
बुलंदशहर। अपने हौसलों को यह मत बताओ कि तुम्हारी परेशानी कितनी बड़ी है, अपनी परेशानी को ये बताओ कि तुम्हारा हौसला कितना बड़ा है। कुछ ही सूत्र वाक्य है नैथला हसनपुर गांव की बीना दीदी यानी बीना शर्मा का। एक हादसे के बाद उनका पैर काटना पड़ा था लेकिन हौसला कम नहीं हुआ। इसके बाद दिव्यांगजनों की सेवा को ही जिंदगी का मिशन बना लिया। उम्र के 66वें पड़ाव में पहुंचने के बाद भी जिले में दिव्यांगों के लिए बीना दीदी उम्मीद की किरण बनी हुई हैं।
बीना शर्मा बताती हैं कि आठवीं कक्षा के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। 15 साल की उम्र में वह घर के छत से गिर गईं। उस समय इलाज बेहतर न मिलने के कारण उनका एक पैर काटना पड़ा था। बावजूद परेशानी कम नहीं हुई तो इलाज कराने जयपुर पहुंचीं। वहां एक बार फिर और पैर काटा गया। उसके बाद कृत्रिम पैर लगा। इससे चलना संभव हुआ। इस दौरान जयपुर के अस्पताल में दिव्यांगजनों को देखकर काफी पीड़ा हुई तो उन्होंने आजीवन दिव्यांगों की सेवा करने की ठान ली। एक बार फिर से पढ़ाई शुरू की। 12वीं करने के बाद ही 1983 में मत्स्य विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर नौकरी मिल गई।
नौकरी मिलने के बाद दिव्यांगों की सेवा के लिए पैसों की जरूरत पूरी हुई। इसके बाद से नौकरी करने के साथ ही दिव्यांगों से जुड़कर उनकी सेवा करती रहीं। इस बीच घर वालों ने शादी का दबाव भी बनाया लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बीना कहती हैं कि शादी के बाद सेवा कार्य प्रभावित हो सकता था, इसलिए उन्होंने शादी से इनकार कर दिया। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह दिव्यांगों की सेवा में जुटी हैं।
10 हजार से अधिक दिव्यांगजन हैं संपर्क में
बीना शर्मा बताती हैं कि इस समय 10 हजार से अधिक दिव्यांग संपर्क में हैं। समय-समय पर उनकी पेंशन बनवाने, उन्हें उपकरण दिलवाने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने का काम कर रही हैं। स्वास्थ्य का चेकअप करवाने के लिए कैंप लगवाने और उनकी मांगों को उठाकर जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। दिव्यांगों को जिले से बाहर भी ले जा कर उनका इलाज करवाने और कृत्रिम उपकरण दिलवाने की भी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
कृत्रिम हाथ-पैर बनवाने की कर रहीं कोशिश
बीना शर्मा ने बताया कि जिले में दिव्यांगों के लिए किसी तरह के उपकरण नहीं बनाए जाते हैं। इसके लिए दिव्यांगों को दूसरे जिलों और राज्यों में जाना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए वह प्रयास कर रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के जरिये सरकार तक यह बात पहुंचा रही हैं।