बुलंदशहर विकास प्राधिकरण कार्यालय से फर्जी पत्रावलियां प्रशासनिक अफसरों को गुमराह करने के लिए भेजी जा रही हैं। बीडीए दफ्तर में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। बीडीए वीसी ने आनन-फानन में बाबू को सस्पेंड कर दिया है, जबकि दो बाबू रडार पर हैं। इनके खिलाफ भी जल्द ही निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है।
नगर पालिका क्षेत्र में लल्ला बाबू चौराहे से अवैध निर्माण को हटाने को लेकर अधिवक्ता प्रशांत कुमार जौहरी द्वारा सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचना मांगी गई थी। आरटीआई के तहत प्राधिकरण द्वारा की गई कार्रवाई का एडीएम प्रशासन को भेजे गए जबाव की छायाप्रति मांगी गई।
आरटीआई लगते ही मामले से संबंधित पत्रावलियां बीडीए दफ्तर में तैनात बाबू दामोदर ने दबा लीं। हद तो तब हो गई, जब बाबू ने एडीएम प्रशासन को फर्जी पत्र ही भेज दिया। इसके अलावा जो सूचना छह नवंबर 2013 को एलबीसी से मांगी गई, उसके जबाव में बुलंदशहर विकास प्राधिकरण से पत्र भेजा गया कि यह सूचना तो 22 मई 2013 को ही भेज दी गई है।
एडीएम प्रशासन को फर्जी पत्र भेजने और पत्रावलियों को बाबू द्वारा दबाने के मामले में बुलंदशहर विकास प्राधिकरण कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन के अफसरों तक हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बीडीए उपाध्यक्ष ने बाबू दामोदर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा दो और बाबू जांच के दायरे में हैं। तय माना जा रहा है कि इन दोनों बाबुओं पर भी कार्रवाई हो सकती है।
मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। बाबू दामोदर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - शैलेंद्र चौधरी, उपाध्यक्ष, बीडीए