इंग्लिश मीडियम के सात हजार बच्चे फिर पढ़ेंगे हिंदी माध्यम से
बुलंदशहर। सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई करने वाले करीब सात हजार बच्चे अब फिर हिंदी मीडियम से पढ़ेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यह बच्चे कक्षा पांच पास करके कक्षा 6 में गए हैं और इनके सामने हिन्दी मीडियम स्कूल ही है। अगर इन्हें आगे भी अंग्रेजी माध्यम पढ़ाई करनी है तो फिर निजी स्कूलों की शरण में जाना पड़ेगा। इन बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों के शैक्षिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
जिले में कुल 2399 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं। इन्हीं में से 176 विद्यालयों में इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई शुरू कराई गई थी। इस बार करीब 20 हजार बच्चों ने कक्षा पांच पास किया है। इनमें इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल के करीब 12 हजार बच्चे भी शामिल हैं। अगली कक्षा में पढ़ने के लिए उन्हें प्राथमिक विद्यालय छोड़कर उच्च प्राथमिक विद्यालय में जाना है। लेकिन इन बच्चों में अधिकतर बच्चों के गांव में जो पूर्व माध्यमिक विद्यालय है वह हिन्दी मीडियम हैं। ये बच्चे अगर सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे तो हिन्दी मीडियम स्कूल ही मिलेगा। अगर उन्हें आगे इंगलिश मीडियम स्कूल में पढ़ाई करनी है तो निजी विद्यालय की शरण लेनी पड़ेगी। गरीब तबके के अभिभावक मंहगी फीस अदा नहीं कर सकते। ऐसी हालत में इन्हें हिंदी मीडियम ही पढ़ना पड़ेगा। इस अव्यवस्था पर शिक्षक व अभिभावकों का कहना है कि आखिर जब हिंदी मीडियम पढ़ना था तो कक्षा पांच तक ही इंग्लिश मीडियम की व्यवस्था क्यों की गई।
नई शिक्षा नीति दे रही मातृ भाषा को प्राथमिकता
बेसिक विद्यालयों में सरकार अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने पर जोर दे रही है। आए दिन इसे लेकर शासनादेश जारी हो रहे हैं। वहीं नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। शिक्षा नीति के पेज नम्बर 19 पर बिंदु संख्या 4.11 में उल्लेख किया गया है कि छोटे बच्चे अपनी घर की भाषा या मातृभाषा में ही सार्थक अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझते हैं। कहा गया है कि कम से कम कक्षा 5 तक मातृ भाषा को प्राथमिकता दी जाय। हो सके तो कक्षा आठ तक मातृभाषा पर जोर दिया जाय। अधिकारियों और शिक्षकों में चर्चा है कि शासनादेश का पालन करें तो मातृ भाषा छूट रही है और शिक्षा नीति लागू हो तो अंग्रेजी माध्यम समाप्त करना पड़ेगा।
शासन और विभाग की फिलहाल जो व्यवस्था है उसी के हिसाब से बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। कोशिश रहेगी कि इन बच्चों को आसपास के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से जोड़ा जाय। - अखंड प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी