खतरा: जर्जर स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हो रहे नौनिहाल
बुलंदशहर। मिशन कायाकल्प के बाद भी जिले के परिषदीय स्कूलों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। सोमवार को बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई। कई प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति ऐसी है कि बच्चे बैठने में भी डरते हैं। बरसात के कारण यह बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है। इन जर्जर विद्यालयों में कहीं प्लास्टर टूटकर गिर रहा है तो कहीं जमीन पर बैठने की भी स्थिति नहीं है।
सात बार लिखा पत्र, अभी तक नहीं ली सुध
गांव चित्सौन स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक वेद प्रकाश गौतम ने बताया कि स्कूल में 12 कमरे हैं। इनमें से प्रथम तल पर बने चार कमरे पिछले कई सालों से जर्जर हाल हैं और यह कभी भी गिर सकते हैं। स्कूल में 172 पंजीकृत हैं, जिन्हें उन चार कमरों में पढ़ाना मजबूरी बन रहा है, जिसके प्रथम तल पर बने कमरे जर्जर हाल हैं। जबकि चार कमरों में जर्जर घोषित हो चुके प्राथमिक विद्यालय के 171 बच्चे भी पढ़ रहे हैं। इस स्कूल का नया भवन बनाने की भी आज तक पहल नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि जर्जर हाल भवन की शिकायत सात बार बीएसए को दी जा चुकी है। लेकिन आज तक किसी ने स्कूल के इस भवन को गिराने की कार्रवाई तो दूर, अभी तक निरीक्षण तक नहीं किया है। यदि इसी तरह लापरवाही बरती जाती रही तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
लगातार छत से गिर रहा प्लास्टर
गांव पूठरी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार ने बताया कि यहां चार कमरे हैं। 46 बच्चे पंजीकृत हैं। सभी कमरे इतने जर्जर हाल हो गए हैं कि इनमें बच्चों को पढ़ाते समय डर बना रहता है कि कोई हादसा न हो जाए। हर समय छत से प्लास्टर गिरता रहता है। जब भी ऐसा होता है तो बच्चे और शिक्षक डर के मारे बाहर निकल जाते हैं। इस समस्या से विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत करवा दिया गया, लेकिन किसी ने आज तक सुध नहीं ली है।
इन स्कूलों की हालत की जानकारी मिल गई है। इन भवनों का निरीक्षण कर स्थिति का आंकलन किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्र के एबीएसए को निर्देशित किया गया है। बच्चों की सुरक्षा जरूरी है और समस्या का जल्द निदान किया जाएगा। - अखंड प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी।