ग्रामीणों को ओलंपिक में अपनी फाइट के बारे में जानकारी देते बॉक्सर सतीश।
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पिता ने दिया 13 टांकों के बावजूद भिड़ने का हौसला : सतीश
सिकंदराबाद। आंख और ठोड़ी पर चोट थी। 13 टांके लगे थे और ओलंपिक के सेमीफाइनल में मेडल के लिए उतरना था। डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी, लेकिन सुबह उठते ही पापा का वीडियो मेसेज मिला- बेटा रिंग में उतरना है नतीजा चाहे जो हो। बस मेसेज सुनते ही सारा दर्द दूर हो गया और मैं उज्बेकिस्तान के बॉक्सर के साथ मुकाबले के लिए रिंग में उतर गया।
टोक्यो ओलंपिक से लौटे बॉक्सर सतीश ने यह बातें अमर उजाला से साझा कीं। सतीश ने कहा ओलंपिक एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म है। उसके लिए क्वालीफाई करना ही मेरे लिए बड़ी बात है। मैंस सुपर हैवीवेट में ओलंपिक में देश की ओर से खेलने वाला पहला खिलाड़ी होना मेरे लिए गर्व की बात है। कुलदेवता लाला जयसिंह का आशीर्वाद साथ था ही। कोच और भाई भी लगातार साथ हौसला दे रहे थे। पापा के वीडियो मेसेज ने तो टॉनिक का काम किया। पापा बोल रहे थे बिना लड़े वापस नहीं आना। इसीलिए अच्छा खेल पाया और मेडल से चूकने के बाद भी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी और उनके कोच ने खेल की तारीफ की।