फसलों की बर्बादी के सर्वे में अब लेखपाल खेल नहीं कर सकेंगे। अब मौसम की मार से बर्बाद होने वाली फसलों का सैटेलाइट से सर्वे होगा। साथ ही सरकार की आर्थिक मदद अब किसानों के जनधन खातों में सीधे पहुंचेगी।
सरकारी मशीनरी के पास फसल बर्बादी के आंकलन की कोई वैज्ञानित पद्धति नहीं है। जमीनी स्तर पर सर्वे का काम लेखपालों के जिम्मे होता था। इसमें फसल की बर्बादी होने पर किसानों को शत-प्रतिशत क्षतिपूर्ति नहीं मिल पाती थी। हर बार सर्वे में धांधली के आरोपों के कारण किसान सड़कों पर उतर आते थे।
पिछले साल भी मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों की सर्वे में ऐसा ही हुआ। तत्कालीन डीएम को किसानों के विरोध के चलते तीन बार सर्वे कराना पड़ा। इसके बाद 1.40 लाख किसानों में 187 करोड़ रुपए का वितरण हो सका। अब सैटेलाइट विधि से होने वाले सर्वे में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकेगी। जिन फसलोें मेें 33 फीसदी तक क्षति होगी उन किसानों को नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई की जाएगी।
चेक की जगह सीधे खाते में जाएगी क्षतिपूर्ति
सैटेलाइट द्वारा सर्वे से चेक वितरण का झंझट खत्म हो जाएगा। अब तक किसानों को चेक से क्षतिपूर्ति की रकम वितरित की जाती थी। चेक से क्षतिपूर्ति के भुगतान में किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती थी। चेक में नाम गलत होने के साथ वितरण में लेखपालों की मनमानी और अवैध वसूली पर ब्रेक लग जाएगा।
सैटेलाइट से फसल की बर्बादी का सर्वे होगा। अब लेखपाल फसलों की बर्बादी का सर्वे नहीं करेंगे। सर्वे के बाद जिन फसलोें में 33 फीसदी से अधिक का नुकसान होगा, उन किसानों के जनधन खातों में सीधे पैसा जाएगा। - आरके सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व