बुलंदशहर। उपभोक्ता को मनमाने और फर्जी बिल भेजकर परेशान करने के एक मामले में बिजली विभाग के अधिकारियों पर जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने फर्जी बिल बनाने के दोषी पाए गए अधिकारियों को उनके वेतन से जुर्माने की वसूली करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने पीड़ित उपभोक्ता को वाद व्यय और मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 30 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
जिला उपभोक्ता आयोग के जन सूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि नगर के मोहल्ला राम विहार निवासी डेविड शर्मा के घर का बिजली मीटर खराब होने पर विभाग के कर्मचारियों ने 22 जुलाई 2022 को उसे उतार लिया था। मीटर की लैब जांच में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई थी। बाद में नया मीटर भी लगाया था। आरोप है कि मीटर की ओके रिपोर्ट आने के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों ने 10 मार्च 2023 को डेविड शर्मा को एक नोटिस भेजा। नोटिस में किसी अन्य मीटर का लोड दर्शाते हुए शर्मा के नाम पर 66,144 रुपये का बकाया बताया था।
डेविड शर्मा ने अधिकारियों के सामने बिल ठीक कराने की गुहार लगाई और उन्हें पुराने मीटर की ओके रिपोर्ट भी दिखाई लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी। अधिकारियों की मनमानी से तंग आकर पीड़ित डेविड शर्मा ने जिला उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। आयोग के न्यायाधीश हसनैन कुरैशी, सदस्य मोहित कुमार त्यागी और महिला सदस्य नीलम कुमारी की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद जारी किए गए बिल को पूरी तरह से गलत पाया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि इस गलत बिल की वसूली उपभोक्ता से करने के बजाय बिजली विभाग की मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) अपने स्तर से इस पूरे मामले की जांच कराएं और संबंधित दोषी अधिकारियों के वेतन से जुर्माने की राशि वसूल करें।
इसके अतिरिक्त, आयोग ने बिजली विभाग को निर्देश दिया है कि पीड़ित डेविड शर्मा को 10 हजार रुपये वाद व्यय और 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए दिए जाएं। आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि एक माह के भीतर यह 30 हजार रुपये का भुगतान नहीं किया जाता है, तो इस पूरी धनराशि पर सात फीसदी की दर से ब्याज भी देना होगा।