बुलंदशहर। दुष्कर्म पीड़ित छह वर्षीय बच्ची को पहले कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में लाया गया था। आरोप है कि इलाज के बजाय डेढ़ घंटे तक चिकित्सक परिवार के लोगों को इधर-उधर घुमाते रहे। इसके बाद प्राथमिक उपचार कर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इस पर परिजनों में आक्रोश है।
परिजनों का कहना है कि खून से लथपथ बच्ची को लेकर वह खुर्जा देहात कोतवाली पहुंचे तो पुलिस ने उपचार एवं मेडिकोलीगल के लिए कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल एवं जिला महिला अस्पताल भेज दिया। मेडिकोलीगल कक्ष पहुंचने पर स्टाफ ने उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल जाने की सलाह दी। बच्ची को लेकर जिला महिला अस्पताल के लेबर रूम पहुंचे तो स्टाफ ने बच्ची को देखना तक उचित नहीं समझा। कहा कि जब तक पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं हो जाती उपचार नहीं हो सकता। खून से लथपथ बच्ची के इलाज के लिए परिजन गुहार लगाते रहे लेकिन किसी का भी दिल नहीं पसीजा।
इसके बाद परिजना दोबारा से बच्ची को लेकर मेडिकोलीगल कक्ष आ गए। बच्ची का इलाज न किए जाने की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई। पुलिसकर्मियों ने भी मिन्नतें कीं। उच्च अधिकारियों से फरियाद करने के बाद ही बच्ची को प्राथमिक उपचार दिया गया। इससे गुस्साए परिजनों ने हंगामा भी किया। आरोप लगाया कि अधिक खून बहने से बच्ची की जान भी जा सकती थी। दुष्कर्म पीड़िता बच्ची की हालत देख मेडिकोलीगल चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट ने मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों को छह बार कॉल कर उपचार के लिए कहा। जब सुनवाई नहीं हुई तो उच्च अफसरों तक मामला पहुंचा। आरोप है कि उन्हें भी लेबर रूम के चिकित्सकों ने गुमराह करने का प्रयास किया।
मामले की जानकारी मिलने पर लेबर रूम के स्टाफ को बच्ची का उपचार करने के निर्देश दिए गए। बच्ची की हालत गंभीर थी। ब्लीडिंग न रुकने पर चिकित्सकों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया। - डॉ. अजय पटेल, सीएमएस, जिला महिला चिकित्सालय
दुष्कर्म पीड़िता बच्ची को उपचार के लिए पुलिसकर्मी मेडिकोलीगल कक्ष पहुंचे थे। वहां से कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला चिकित्सालय भेजा गया। वहां उपचार न मिलने पर सीएमएस से वार्ता की गई। इसके बाद उपचार मिला। - डॉ. हरेंद्र बंसल, डिप्टी सीएमओ