नई स्थानांतरण नीति के विरोध में फार्मासिस्टों ने नहीं किया काम
बुलंदशहर। नई स्थानांतरण नीति के विरोध में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने शनिवार को दो घंटे कार्य बहिष्कार किया। साथ ही जिला अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन कर स्थानांतरण नीति वापस लेने की मांग की। फार्मासिस्ट के धरने में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों के शामिल होने से स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। दो घंटे कार्य का बहिष्कार किए जाने से मरीजों और तीमारदारों को परेशानियां उठानी पड़ीं। वहीं, रविवार को भी दो घंटे कार्य का बहिष्कार कर विरोध करेंगे।
एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. विपिन गुप्ता और डॉ. शैलेंद्र गौतम ने कहा कि तमाम ऐसे कर्मचारी हैं, जिनके बच्चे पढ़ते हैं। उनका स्थानांतरण होता है तो पूरा परिवार ही अव्यवस्थित हो जाएगा। कोरोना के दौर में यह नीति मान्य नहीं करेंगे। धरना प्रदर्शन में पीएमएस संवर्ग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आशीष प्रकाश, कार्यवाहक सीएमएस डॉ. एमपी सिंह, डॉ. पंकज उपाध्याय, डॉ. अमित माथुर, संयुक्त कर्मचारी परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र शर्मा, डीपीए के अध्यक्ष डॉ. जेपी तेवतिया समेत स्वास्थ्य महासंघ से संबंधित कर्मी और अधिकारी मौजूद रहे।
काउंटर खुलने के इंतजार में जमीन पर बैठ किया इंतजार
सुबह ओपीडी में प्राथमिक उपचार कराने आए लोगों को दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान ओपीडी पंजीकरण कक्ष के बाहर और ओपीडी गेट के पास इंतजार में लोग जमीन पर बैठे नजर आए। मेडिकल बनवाने आए बिजेंद्र ने बताया कि ड्यूटी पर जाने से पूर्व छुट्टी का मेडिकल बनवाने सुबह अस्पताल आया। लेकिन दो घंटे तक हड़ताल के चलते इंतजार करना पड़ा।
चिकित्सक को दिखाने के लिए लगी लाइन
फार्मासिस्ट द्वारा दो घंटे कार्य बहिष्कार के बाद जब धरना समाप्त हुआ तो ओपीडी में चिकित्सकों के कक्ष के बाहर लंबी लाइन लग गई। इस दौरान मरीज पहले दिखाने को लेकर धक्का-मुक्की भी करते रहे। वहीं, सोशल डिस्टेंसिग का उल्लंघन हुआ। लेकिन इस और किसी भी चिकित्सक या अस्पताल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
सुबह आठ से 10 बजे तक फार्मासिस्ट के कार्य बहिष्कार के दौरान ओपीडी सेवा प्रभावित रही। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गईं। जिससे आकस्मिक समय में किसी को कोई परेशानी ना हो। 10 बजे के बाद ओपीडी सेवा बहाल होने पर दोपहर दो बजे तक 628 मरीजों द्वारा पंजीकरण करा प्राथमिक उपचार कराया गया।
डॉ. राजीव प्रसाद, सीएमएस