जनपद में धान खरीद का हश्र भी गेहूं खरीद की तरह होने जा रहा है। एक अक्तूबर से शुरू होने वाले केंद्रों पर अब तक धान की खरीद शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में किसान मंडियों में भटकने को मजबूर हैं ।
जनपद को शासन ने 900 मीट्रिक टन (एमटी) धान खरीद का लक्ष्य दिया है। 500 मीट्रिक टन धान एफसीआई को खरीदना है। बाकी 200-200 मीट्रिक टन धान की खरीद खाद्य निगम और पीसीएफ को करनी है। इसके लिए मार्केटिंग विभाग ने पांच क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। मागर अभी तक सरकारी क्रय केंद्रों पर एक दाना धान नहीं खरीदा गया है।
धान खरीद नहीं होने से किसानों ने धान मंडियों का रूख करना शुरू कर दिया है। धान मंडियों में किसानों को समर्थन मूल्य से कम दाम मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि केंद्रोें पर धान ले जाते हैं, मगर कर्मचारी धान को रिजेक्ट कर किसानों को लौटा रहे हैं।
डिप्टी आरएमओ अविनाश ने बताया कि ग्रेड वन धान का समर्थन मूल्य 1524 रुपये हैं। जबकि मंडियों में दाम इससे कही अधिक हैं। कुल मिलाकर अब तक दोनों किस्मों के धान की खरीद शून्य है।